23.5 C
Jabalpur
October 27, 2026
सी टाइम्स
जीवनशैली

28 अक्टूबर का पंचांग: सुबह 11:14 से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा अमृतकाल, तुला राशि में रहेंगे सूर्य देव

नई दिल्ली,  हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि बुधवार को तड़के 4:07 बजे से शुरू होकर गुरुवार की रात 1:06 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 29 अक्टूबर की रात 10:10 बजे तक रहेगी। बुधवार को सुबह 6:33 बजे सूर्योदय और शाम 5:47 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 7:31 बजे चंद्रोदय और अगले दिन सुबह 9:47 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं। स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और स्वामी राहु हैं।

इस नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से लोगों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से निकलकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना प्रबल होती है। बुधवार सुबह 7:18 बजे तक व्यतिपात योग रहेगा। इसके बाद वरीयान योग शुरू हो जाएगा। ज्योतिष के अनुसार, वरीयान योग बेहद शुभ, श्रेष्ठ और सकारात्मक योगों में गिना जाता है। यह पंचांग के 27 नित्य योगों में से 18वाँ योग है। इस योग के अधिपति देवता धन के देवता कुबेर जी हैं। यह योग सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य, आर्थिक मजबूती और सफलता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है।

आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवाँ मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है। बुधवार को सुबह 11:14 से दोपहर 12:41 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

इस दिन राहुकाल दोपहर 12:10 बजे से 1:34 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। बुधवार को यमगंड काल सुबह 7:58 से 9:22 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेन-देन से बचना चाहिए। इस दिन गुलिक काल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है।

यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है। बुधवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य जब तुला राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य का नीच होना या नीचस्थ होना कहा जाता है। सूर्य अग्नि तत्व का कारक है, जबकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन आती है, जो सूर्य के स्वभाव के विपरीत है। सूर्य को अहंकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। तुला राशि में आने से आत्मबल या ऊर्जा थोड़ी कमजोर महसूस हो सकती है। इस स्थिति में किसी भी फैसले पर पहुँचना मुश्किल हो सकता है। इस दिन चंद्र देव वृषभ राशि में रहेंगे; पूरे दिन और रात चंद्रमा वृषभ राशि में संचार करेंगे। ज्योतिष के अनुसार, वृषभ राशि में चंद्रमा का होना उच्च और अत्यंत शुभ माना जाता है। वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं। चंद्रमा मन और भावनाओं के कारक हैं। वृषभ में होने से मन शांत, स्थिर और संयमित रहता है। भावनाओं में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है। बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।

अन्य ख़बरें

करवा चौथ का निर्जला व्रत किसे नहीं रखना चाहिए? कहीं आप भी तो इस लिस्ट में नहीं शामिल

Newsdesk

हवा में मौजूद पीएम 2.5 कणों से कैसे बचें? सही मास्क की पहचान और बच्चों के लिए मास्क खरीदने से पहले जान लें ये बातें

Newsdesk

27 अक्टूबर का पंचांग: सुबह 10:52 बजे तक रहेगा सिद्धि योग, उत्तर दिशा में यात्रा करना टाल दें

Newsdesk

Leave a Comment

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading