एकलपीठ का आदेश निरस्त; 1000 से अधिक कर्मचारियों पर पड़ सकता है असर, एड-हॉक वेतन वृद्धि की राशि वसूलने का रास्ता खुला
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने पुलिस विभाग के मंत्रालयिक संवर्ग के कर्मचारियों को दी गई अतिरिक्त एड-हॉक वेतन वृद्धि की वसूली से जुड़े मामले में राज्य सरकार की पांच रिट अपीलें स्वीकार कर ली हैं। 28 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए फैसले में न्यायमूर्ति विवेक रुसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने एकलपीठ के पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए अतिरिक्त भुगतान की मूल राशि की वसूली को वैध ठहराया है।
मामले में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि पुलिस के मंत्रालयिक कर्मचारी और कार्यकारी पुलिस बल के कार्य तथा सेवा संबंधी योग्यताएं अलग-अलग हैं। इसलिए मंत्रालयिक संवर्ग के कर्मचारी कार्यकारी पुलिस बल के समान वेतनमान अथवा संबंधित एड-हॉक वेतन वृद्धि का स्वतः दावा नहीं कर सकते। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के एस.एच. बैग बनाम मध्यप्रदेश राज्य मामले में दिए गए निर्णय का भी हवाला दिया गया।
अदालत ने वसूली पर रोक से संबंधित रफीक मसीह प्रकरण के सिद्धांतों पर विचार करते हुए माना कि मौजूदा मामले में न्यायालयीन स्थगन और लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के कारण वसूली लंबित रहने की परिस्थितियां महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार का पक्ष था कि अतिरिक्त भुगतान की राशि माफ करने से सरकारी खजाने पर वित्तीय भार पड़ेगा।
इस कानूनी मामले में उप महाधिवक्ता अभिजीत ए. अवस्थी और पुलिस रेडियो विभाग, जबलपुर में पदस्थ तथा गृह एवं पुलिस विभाग के समन्वयक संदीप रघुवंशी की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, पुराने मुकदमों, पूर्व न्यायिक आदेशों और संबंधित दस्तावेजों को संकलित कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
खंडपीठ के फैसले से संबंधित कर्मचारियों से अतिरिक्त एड-हॉक राशि की वसूली का रास्ता खुल गया है। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी पर वास्तविक वित्तीय प्रभाव संबंधित आदेशों और विभागीय कार्रवाई पर निर्भर करेगा।


