November 7, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

जमुना कॉलरी में 30 फीट धंसी जमीन, SECL प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल



दशकों पुरानी भूमिगत खदानों के ऊपर बसे आवास, कंपनी की भूमि पर अवैध निर्माण और भू-धंसान के खतरे की अनदेखी पड़ सकती है भारी
-कोतमा/। एसईसीएल के जमुना-कोतमा क्षेत्र अंतर्गत जमुना कॉलरी के वार्ड क्रमांक 5 में एक मकान के भीतर अचानक जमीन धंसने और लगभग 30 फीट गहरा गड्ढा बनने की घटना ने खनन सुरक्षा तथा प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी की चेतावनी हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि जमुना कॉलरी की भूमि वर्ष 1963 में कोयला उत्खनन एवं कर्मचारियों की आवासीय व्यवस्था हेतु अधिग्रहित किए जाने की जानकारी है। राष्ट्रीयकरण से पूर्व यहां जमुना 1/2 एवं 5/6 नंबर इन्क्लाइन से भूमिगत कोयला उत्खनन किया जाता था। राष्ट्रीयकरण तथा कोयला कंपनियों के पुनर्गठन के बाद यह क्षेत्र वर्तमान में एसईसीएल के अधीन है।

खनन विज्ञान के अनुसार, दशकों पूर्व भूमिगत कोयला उत्खनन से बने खाली स्थानों और कमजोर चट्टानी संरचनाओं के कारण वर्षों बाद भी भू-धंसान हो सकता है। हालांकि, वर्तमान घटना का वास्तविक कारण तकनीकी जांच से ही स्पष्ट होगा।

गंभीर प्रश्न यह है कि क्या एसईसीएल प्रबंधन के पास पुराने भूमिगत खनन क्षेत्रों के अद्यतन जोखिम मानचित्र उपलब्ध हैं? यदि हैं, तो संवेदनशील आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय क्यों दिखाई नहीं देते?

दूसरी ओर, जमुना-कोतमा क्षेत्र में एसईसीएल की सैकड़ों एकड़ भूमि पर कथित अवैध कब्जे तथा निजी मकानों और दुकानों के निर्माण का मामला भी गंभीर चिंता का विषय है। पुराने भूमिगत खनन क्षेत्रों के ऊपर बिना भू-तकनीकी जांच के निर्माण लोगों की जान-माल के लिए खतरा बन सकते हैं।

Coal Mines Regulations, 2017 के विनियमन 65 में भूमिगत खनन कार्यों एवं सतही संरचनाओं के मानचित्र रखने संबंधी प्रावधान हैं। ऐसे में प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है कि वह पुराने खनन मानचित्रों के आधार पर संभावित भू-धंसान वाले क्षेत्रों की पहचान करे।

इस घटना के बाद आवश्यक है कि DGMS एवं CMPDI के तकनीकी विशेषज्ञों से पूरे संवेदनशील क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, कंपनी की भूमि का सीमांकन, अनधिकृत निर्माणों की जांच तथा जोखिम वाले स्थानों पर आवश्यक सुरक्षा एवं पुनर्वास संबंधी कार्रवाई कराई जाए।

सबसे बड़ा सवाल—क्या एसईसीएल प्रबंधन किसी बड़ी जनहानि की प्रतीक्षा कर रहा है?

जमुना कॉलरी में धरती का धंसना प्राकृतिक अथवा खननजनित भूवैज्ञानिक घटना हो सकती है, लेकिन संभावित खतरे की जानकारी के बावजूद सुरक्षा उपायों की अनदेखी प्रशासनिक जवाबदेही का विषय है। प्रबंधन को चाहिए कि घटना की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और पूरे जमुना-कोतमा क्षेत्र के पुराने भूमिगत खनन स्थलों की सुरक्षा समीक्षा सार्वजनिक करे।

क्योंकि अगली बार केवल जमीन ही नहीं, किसी परिवार की पूरी जिंदगी भी इस गड्ढे में समा सकती है।

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