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May 18, 2022
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पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक संदेश देने का विषय बना ‘बुलडोजर’

कोलकाता, 14 मई (आईएएनएस)| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने ‘बुलडोजर बाबा’ का ताना मारा था। हालांकि यह शब्द बाद में लोकप्रिय हो गया और पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक संदेश देने का विषय बन गया है। पश्चिम बंगाल में प्रमुख भाजपा विरोधी दलों को लगता है कि यह ‘बुलडोजर की राजनीति’ केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है और भगवा ताकतें इस राजनीति को एक विशेष समुदाय के लोगों के खिलाफ लागू करने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें लगता है कि बुलडोजर की यह राजनीति और कुछ नहीं बल्कि महंगाई, ईंधन और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और बेरोजगारी के बढ़ते ग्राफ जैसे ज्वलंत आर्थिक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है।

‘बुलडोजर की राजनीति’ के खिलाफ विरोध सबसे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 21 अप्रैल को बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट- 2022 के उद्घाटन के दौरान जताया था। देश के शीर्ष उद्योगपतियों की उपस्थिति में उन्होंने इस पर एक चुटकी ली थी। जहां उसने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि यह ‘बुलडोजिंग राजनीति’ एक विशेष समुदाय के लोगों के खिलाफ निर्देशित है, चाहे वह उत्तर प्रदेश में हो या दिल्ली के जहांगीरपुरी में हो।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम बुलडोजर में विश्वास नहीं करते हैं। हमारा उद्देश्य लोगों को विभाजित नहीं करना है। बल्कि हम लोगों को एकजुट करना चाहते हैं, क्योंकि एकता हमारी ताकत है। जब आप एकजुट होंगे, तभी आप सांस्कृतिक रूप से स्वस्थ होंगे। लेकिन अगर आप विभाजित हो गए तो आप गिर जाएंगे।”

इस बारे में तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनकी राय में यह एक विशेष समुदाय के लोगों को लक्षित ज्वलंत मुद्दों से ध्यान हटाने की एक और चाल है।

वयोवृद्ध माकपा नेता और पार्टी के पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य हन्नान मुल्लाह ने आईएएनएस से कहा कि यह सही समय है कि सत्तारूढ़ भाजपा को इस ‘बुलडोजर की राजनीति’ को आगे बढ़ाने के खतरे को समझना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं कि ये सभी भटकाने वाले हथकंडे हैं जिनका इस्तेमाल यह भगवा सरकार शुरू से ही ज्वलंत आर्थिक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए कर रही है। लेकिन मेरी उन्हें चेतावनी है कि उन्हें श्रीलंका से सबक लेना चाहिए। अगर बुलडोजर की राजनीति ऐसे ही चलती रही तो देश में एक सहज जन आंदोलन होना तय है जो किसी के वश में नहीं होगा। राजनीति में धर्म का इस्तेमाल किसी को कहीं नहीं ले जाता है।”

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने शुक्रवार सुबह कोलकाता में एक कार्यक्रम में श्रीलंका के हालिया घटनाक्रम से सबक लेने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

येचुरी ने कहा, “हमारा पड़ोसी द्वीप देश वहां की सरकार के खिलाफ सहज जन आंदोलन का एक उदाहरण है। श्रीलंका से सबक लेने की जरूरत है। लोग देश के सच्चे मालिक हैं और सरकार सिर्फ प्रबंधक है। इसलिए, लोगों के पास उस प्रबंधक को हटाने की शक्ति है।”

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य के अनुसार, ‘बुलडोजर की राजनीति’ या ‘बुलडोजर बाबा’ जैसे शब्द अवैध अतिक्रमणकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए विपक्षी ताकतों द्वारा गढ़े गए हैं। उन्होंने कहा, “विपक्षी दल क्या चाहते हैं? क्या वे चाहते हैं कि अवैध अतिक्रमण करने वाले अवैध रूप से कब्जे वाली जमीन पर अधिकार स्थापित करें? और यहां धर्म का कोई सवाल ही नहीं है। यह कानून तोड़ने वालों के खिलाफ वैध कार्रवाई है।”

राजनीतिक विश्लेषक डॉ अमल कुमार मुखोपाध्याय को भी लगता है कि यह ‘बुलडोजर की राजनीति’ आग से खेलने के समान है। उन्होंने कहा, “पहले विभिन्न देशों में कई निरंकुश शासनों ने आग से खेलने का प्रयास किया है। आखिरकार, उन्हें जन आंदोलन के आगे झुकना पड़ा। दिल्ली में, इस बुलडोजर राजनीति के खिलाफ पहले से ही प्रतिरोध है और अधिकारियों को पीछे हटना पड़ा।”

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