September 13, 2026
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देश की समस्या के समाधान में केवल विज्ञान नहीं, सांस्कृतिक कायाकल्प की भी जरूरत : नारायणमूर्ति

बेंगलुरु ,15 जुलाई । इंफोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति ने कहा कि देश की बड़ी समस्याओं को हल करने के लिए भारतीय मानसिकता में परिवर्तन की आवश्यकता है केवल विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग से काम नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा कि हर देश को अपनी समस्या के समाधान के लिए अपने लोगों की बुद्धि के प्रयोग की जरूरत होती है। हमारे वैज्ञानिक, गणितग्य और इंजीनियर देश की समस्याओं के समाधान के निवारण में अग्रीम पंक्ति के योद्धा की तरह से हैं लेकिन इस दिशा में लोगों की सोच में बदलाव महत्वपूर्ण है।
इंफोसिस साइंस फाउंडेशन(आईएसएफ) की नयी इमारत के उद्घाटन पर उन्होंने कहा, लोग विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग में रूचि रखते हैं। हमें सोचना होगा कि इनसे किस प्रकार से बड़ी समस्याओं का समाधान होगा। मुझे लगता है कि केवल विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग से बड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। भारतीय मानसिकता को बदलने के लिए सांस्कृतिक कायाकल्प की जरूरत है।
आईएसएफ पेशेवरों के लिए इमारत में कार्यालय, सम्मेलन कक्ष, एक 100-सीटों वाला प्रौद्योगिकी सक्षम सभागार और खाने के लिए एक बड़ा स्थान है।
उन्होंने कहा, हमने अंतरिक्ष में रॉकेट और सैटेलाइट भेजे हैं। हमने इस्पात तथा ऊर्जा कारखाने और बड़े बांधों का निर्माण किया है। हमने ह्दय और किडनी का प्रत्यारोपण करते हैं। लेकिन हम 1.4 अरब भारतीयों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सभी के लिए घर की बड़ी समस्याओं के निपटान से बहुत दूर हैं।
श्री मूर्ति ने कहा कि वक्त की मांग है कि इन बड़ी समस्याओं से जल्द, उन्नत और मुनासिफ उपायों के लिए देश को मानव मस्तिष्क के इस्तेमाल की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, मुझे ऐसा कोई देश मालूम नहीं है जिसने गरीबी, स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि बिना मानव मस्तिष्क की ताकत के हासिल की हो। हमारे विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग शोधकर्ता हमारी महान समस्याओं के खिलाफ हमारे युद्ध में देश के अग्रणी योद्धा हैं। इसलिए हमें उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।
श्री मूर्ति ने कहा कि इन्फोसिस पुरस्कार के कुछ विजेताओं ने कुछ कठिन समस्याओं को हल करने की इच्छा में उपयोगी कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि आईएसएफ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति के इस कथन में विश्वास रखता है कि किसी देश की प्रगति का पैमाना यह नहीं है कि वहां धन वाले लोग बहुत हैं बल्कि देश की प्रगति माप इस बात से की जानी चाहिए की वहां बहुत कम साधन वाले लोगों को क्या पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं।
श्री मूर्ति ने कहा,देश की महान समस्याओं के खिलाफ इस युद्ध में हमारा छोटा सा योगदान इन अग्रिम पंक्ति के शोधकर्ता-योद्धाओं को पहचानना, सराहना करना, सम्मान करना और पुरस्कृत करना है। हमें साल दर साल ऐसा करने पर गर्व है।

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