23 C
Jabalpur
September 13, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन और बाजार पहुंच पर की चर्चा



नई दिल्ली, 12 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों और एक-दूसरे के बाजारों तक सार्थक एवं पूर्वानुमेय पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद यह जानकारी दी।



विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संपर्क में हुई प्रगति का स्वागत किया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों तथा दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही को और बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।



बयान में कहा गया कि आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं और बाजार तक बेहतर एवं भरोसेमंद पहुंच सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों के समाधान की जरूरत पर सहमति जताई।



यह द्विपक्षीय बैठक नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर हुई। करीब सात वर्षों बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। साथ ही यह लगातार तीसरा वर्ष है, जब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी की मुलाकात हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात कजान और तियानजिन में हुई थी।



बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में भिन्नताएं होने के बावजूद वे साझा विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग और समर्थन करने में सक्षम रहे हैं।



प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग और समर्थन के लिए राष्ट्रपति शी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के पास द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर है।



भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 112.16 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि 2024-25 में यह 99.21 अरब डॉलर था। इस बढ़ते घाटे ने दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित और टिकाऊ बनाने की जरूरत को और प्रमुख बना दिया है।



वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन को निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर रहा, जबकि चीन से आयात 16.03 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया। इसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटा और अधिक बढ़ गया।



इसी अवधि में भारत-चीन कुल वस्तु व्यापार 18.31 प्रतिशत बढ़कर 151.10 अरब डॉलर पहुंच गया। चीन अब अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। हालांकि, व्यापार असंतुलन केवल उपभोक्ता वस्तुओं का मामला नहीं है। भारत चीन से बड़ी मात्रा में औद्योगिक कच्चा माल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर और पूंजीगत सामान आयात करता है, जिनका उपयोग भारतीय उद्योग उत्पादन और रोजगार सृजन के लिए करते हैं।



ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और ऑर्गेनिक केमिकल्स जैसे चार प्रमुख क्षेत्र भारत के चीन से होने वाले आयात का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का लगभग 43 प्रतिशत और मशीनरी एवं कंप्यूटर आयात का लगभग 40 प्रतिशत चीन से करता है।



रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत छह महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चीन से आयात करता है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल और रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन चीन पर काफी हद तक निर्भर रहती है। ऐसे में यदि चीन इन महत्वपूर्ण निर्यातों पर रोक लगाता है या प्रतिबंध लगाता है तो भारत की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।



दूसरी ओर, चीन भारत से निवेश नियमों में ढील की उम्मीद कर रहा है, ताकि उसकी कंपनियां तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में अधिक निवेश कर सकें।


अन्य ख़बरें

भाजपा नेताओं ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के गिनाए फायदे, विपक्ष को भी दिया जवाब

Newsdesk

हरियाली के रंग में रंगा  हाईकोर्ट बार

Newsdesk

NSA आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की सत्यता पर उठाए सवाल

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading