नई दिल्ली, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)| दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में दिल्ली और उसके आसपास बच्चों द्वारा भीख मांगने और संबंधित समस्याओं को खत्म करने के लिए कदम उठाने की मांग करने वाली याचिका पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने के लिए दिल्ली सरकार को फटकार लगाई।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, “सरकार या तो प्रतिक्रिया दर्ज नहीं करती है, प्रतिवादियों को प्रति प्रदान नहीं करती है या कार्यवाही में देरी करने के लिए दोषपूर्ण फाइल करती है।”
कोर्ट ने आम आदमी पार्टी की सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने और उसकी एक प्रति इस मामले में याचिकाकर्ता अजय गौतम को उपलब्ध कराने के लिए और समय दिया है। पीठ ने दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया है।
गौतम ने एक याचिका दायर कर पूछा था कि क्या राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13 (ई) और (एफ) के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए बाध्य है।
उन्होंने अदालत से दिल्ली पुलिस को संगठित यौन शोषण में शामिल माफियाओं/गिरोहों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया और महिलाओं को भीख मांगने और अन्य संबंधित अपराधों के लिए अपने बच्चों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया।
गौतम ने शिकायत की है कि दिल्ली के ट्रैफिक सिग्नलों, खरीदारी स्थलों, रेलवे स्टेशनों और अन्य जगहों पर हर जगह बाल भिखारी देखे जा सकते हैं और संबंधित विभाग ने अभी भी इन प्रथाओं को रोकने के लिए कदम नहीं उठाया है।
भीख मांगने वाले माफिया न केवल बच्चों द्वारा भीख मांगने में सक्रिय रूप से शामिल हैं, बल्कि इसके लिए वे मासूम बच्चों का अपहरण, प्रशिक्षण, जबरदस्ती और अत्याचार भी करते हैं।


