September 16, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिकलीगल

कोलकाता हाई कोर्ट ने विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी की मान्यता पर अंतरिम रोक लगाने से किया इनकार

कोलकाता, 11 जून । कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ वाली अवकाशकालीन बेंच ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के नए अध्यक्ष रथींद्र बोस द्वारा निष्कासित तृणमूल कांग्रेस विधायक ऋतब्रत बनर्जी को सदन में पार्टी के बहुमत गुट का नेता और आधिकारिक विपक्ष के नेता (एलओपी) के रूप में मान्यता देने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। स्पीकर के इस फैसले को चुनौती देते हुए इस सप्ताह की शुरुआत में एक याचिका दायर की गई थी। गुरुवार को न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ वाली अवकाशकालीन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की अंतरिम संरक्षण आदेश की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पहले इस मामले से संबंधित स्पीकर का आदेश न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। साथ ही सभी पक्षों को निर्देश दिया कि स्पीकर का आदेश रिकॉर्ड पर आने के बाद ही अदालत का रुख करें। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी राजनीतिक दल से निष्कासित विधायक, इस मामले में ऋतब्रत बनर्जी, संबंधित दल की औपचारिक सहमति के बिना विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायक, जिनकी संख्या ऋतब्रत बनर्जी के अनुसार 1 जून तक बढ़कर 65 हो गई थी, उनके नेतृत्व वाले नए गुट का समर्थन कर रहे हैं। वहीं 20 विधायक पुराने गुट के साथ बने हुए हैं और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए हुए हैं। इस बीच, विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में शोभनदेब चट्टोपाध्याय, दो उपनेताओं के रूप में असीमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय तथा मुख्य सचेतक के रूप में फिरहाद हकीम के नामांकन संबंधी प्रस्ताव में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी को लेकर अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की जांच पहले से जारी है। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इन कथित हस्ताक्षर विसंगतियों की जानकारी स्पीकर कार्यालय को दी थी, जिसके बाद सीआईडी जांच शुरू की गई। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके कुछ समय बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने बगावत कर दी और खुद को तृणमूल कांग्रेस विधायक दल का बहुमत गुट बताते हुए स्पीकर को नया प्रस्ताव सौंपा। स्पीकर ने इस नए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक रूप से पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी।

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