30.5 C
Jabalpur
October 28, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीयहेडलाइंस

सरकारी बंगला आवंटन पर ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे राघव चड्ढा

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने मंगलवार को ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया, जिसमें कहा गया था कि उनके पास पंडारा रोड में सरकारी टाइप-7 बंगले पर कब्जा जारी रखने का कोई अधिकार नहीं है। यह बंगला लुटियंस दिल्ली में आता है।

इस तरह के बंगले उन सांसदों को आवंटित किए जाते हैं जिन्होंने मंत्री, मुख्यमंत्री या राज्यपाल के रूप में कार्य किया है।

चड्ढा के वकील ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की खंडपीठ को बताया कि उनके मुवक्किल को ट्रायल कोर्ट के आदेश के बाद बेदखली नोटिस जारी किया गया है। पीठ ने 11 अक्टूबर को सुनवाई के लिए अनुमति दे दी।

ट्रायल कोर्ट ने कहा था: “वादी (राघव चड्ढा) यह दावा नहीं कर सकता कि उसे राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान आवास पर कब्जा जारी रखने का पूरा अधिकार है। सरकारी आवास का आवंटन केवल वादी को दिया गया विशेषाधिकार है, और आवंटन रद्द होने के बाद भी उसे उस पर कब्जा जारी रखने का कोई अधिकार नहीं है।”

सचिवालय का मामला था कि सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 80(2) का पालन किए बिना चड्ढा को अंतरिम राहत दी गई थी।

सचिवालय के अनुसार, प्रावधान के तहत ऐसी राहत देने से पहले दोनों पक्षों की सुनवाई की जानी चाहिए थी।

अंतरिम आदेश को रद्द करते हुए अदालत ने चड्ढा की इस दलील को खारिज कर दिया कि एक बार किसी सांसद को आवास आवंटित हो जाने के बाद, इसे उनके पूरे कार्यकाल के दौरान किसी भी परिस्थिति में रद्द नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि अदालत को दोनों पक्षों को सुनना होगा, मुकदमे की प्रकृति पर विचार करना होगा और मामले की तात्कालिकता का आकलन करना होगा, अंतिम निर्णय लेने से पहले।

इसमें कहा गया कि चड्ढा के मामले में दी गई अंतरिम राहत एक गलत थी और 18 अप्रैल के आदेश को वापस ले लिया गया और रद्द कर दिया गया।

अप्रैल में, अदालत ने सचिवालय को निर्देश दिया था कि आवेदन लंबित रहने के दौरान कानून की उचित प्रक्रिया के बिना चड्ढा को बंगले से बेदखल न किया जाए।

चड्ढा की इस दलील पर भी विचार किया गया कि सचिवालय जल्दबाजी में काम कर रहा है और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना उन्हें बेदखल किए जाने की संभावना है।

न्यायाधीश ने निष्कर्ष निकाला था कि कानून की उचित प्रक्रिया के बिना चड्ढा को बंगले से बेदखल करने से रोकने के लिए निर्देश जारी करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला स्थापित किया गया था।

अन्य ख़बरें

आंध्र तट के करीब पहुंचा चक्रवात अर्नब, 150 किमी प्रति घंटे तक चलेंगी हवाएं

Newsdesk

‘जनता और राष्ट्र की सेवा करना ही सुशासन का मूल आधार है’, प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया सुभाषित

Newsdesk

भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को यूएई ने दिया ‘ऑर्डर ऑफ जायद II’ सम्मान

Newsdesk

Leave a Comment