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April 25, 2026
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राष्ट्रीय

मप्र में ज्यादा बारिश से साढ़े 9 हजार करोड़ का नुकसान : चौहान

भोपाल, 19 मई (आईएएनएस)| मध्यप्रदेश में कोरोना के बीच आम आदमी की जिंदगी को पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। तमाम एहतियात बरतते हुए सरकारी, गैर सरकारी और औद्योगिक गतिविधियों के फिर गति पकड़ने के आसार बनने लगे हैं। राज्य में कोरोना महामारी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन चार में सरकार ने खास रणनीति बनाई है। अब राज्य में कोरोना की स्थिति के चलते सिर्फ रेड और ग्रीन जोन ही होगा। ग्रीन जोन में लगभग आम आदमी की जिंदगी पुरानी स्थिति की तरफ लौटने लगेगी, क्योंकि इन इलाकों में सभी गाइड लाइनों को पूरा करते हुए तमाम गतिविधियां शुरू होने लगी है। राज्य में कुल 52 जिले हैं, जिसमें से सिर्फ दो जिले इंदौर व उज्जैन के संपूर्ण रेड जोन में रखे गए है। इसके अलावा भोपाल, बुरहानपुर, जबलपुर, खंडवा व देवास के नगर पालिक निगम क्षेत्र, मंदसौर , धार, कुक्षी व नीमच के नगर पालिका क्षेत्र यह रेड जोन में है। शेष पूरा प्रदेश ग्रीन जोन में है। दोनों ही जोन में स्कूल, कलेज, कोचिंग, प्रशिक्षण संस्थान, होटल, रेस्टोरेंट, हस्पिटेलिटी सेवाएं, सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थियेटर्स, बार, ऑडिटोरियम प्रतिबंधित बंद है। इसके साथ सामुदायिक कार्यक्रम, सभी प्रकार के सामाजिक, राजनैतिक, खेलकूद, मनोरंजन, अकादमिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आयोजन नहीं हो सकेंगे। सभी धार्मिक स्थल, पूजा स्थल तथा धार्मिक सभाएं प्रतिबंधित की गई है। ग्रीन जोन में पाबंदी वाले क्षेत्रों को छोड़कर सभी दुकानें एवं बाजार खुले खुलने लगे है, सब्जी मंडियां मंडियों में भी फिर रौनक लौटने को है, निजी व शासकीय कार्यालय पूरी क्षमता से चलेंगे तथा निजी वाहनों से लोग आवागमन किया जा सकेगा। यह स्थिति पटरी पर लौटती जिंदगी की तरफ संकेत दे रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सेामवार की रात को प्रदेश की जनता के नाम दिए संदेश में कहा, "कोरोना केा रोकने के लिए सभी सतर्क रहने की जरुरत है। इसके चलते सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थल पर मास्क पहनना अनिवार्य होगा, इन स्थानों पर थूकने पर जुर्माना लगाया जाएगा, फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा, विवाह में अधिकतम 50 लोग शामिल हो सकेंगे, अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 लोग जा सकेंगे, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना, पान, तम्बाकू, गुटखा खाना प्रतिबंधित होगा।" उन्हेंने कहा, "दुकानों पर ग्राहकों के बीच दो गज की दूरी रखना अनिवार्य होगा तथा एक समय में दुकान पर पांच से अधिक लोग नहीं रह सकेंगे। सभी कार्य स्थलों के प्रवेश द्वार एवं प्रस्थान द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग, हैण्डवाश और सेनेटाईजर की व्यवस्था, पूरे कार्य-स्थल पर नियमित सेनेटाईजेशन तथा लंच ब्रेक आदि में फिजिकल डिस्टेंसिंग अनिवार्य होगी।" राज्य में नई व्यवस्था के चलते मंगलवार को बाजारों में रौनक दिखने लगी है, सुबह सात बजे से रात सात बजे तक दुकानें खुली रहेंगी और लोग शर्तों का पालन करते हुए आवाजाही कर रहे हैं। राज्य के रेड जोन केा छोड़कर ग्रीन जोन में शराब और भांग की दुकानें भी खुलने लगी है। वहीं शराब कारोबारियों ने लायसेंस फीस में कटौती किए जाने की मांग को लेकर गृहमंत्री डा नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की है। गृहमंत्री डॉ. मिश्रा ने रेड और ग्रीन जोन का ब्यौरा देते हुए बताया, "ग्रीन जोन में सब कुछ खुल गया है मगर रेड जोन में प्रतिबंधात्मक है। संबंधित जिलों की स्थिति को देखते हुए ही रेड और ग्रीन जोन तय किए गए है।"

भोपाल 11 सितंबर | मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में ज्यादा बारिश और बाढ़ की वजह से शुरुआती आकलन के मुताबिक लगभग 9 हजार 500 करोड़ की नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री चौहान ने शुक्रवार को निवास पर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अवलोकन और अध्ययन करने आए केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों से चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में बीते पखवाड़े अतिवर्षा से हुई हानि की विस्तृत जानकारी केन्द्र सरकार को दी गई है।

उन्होंने बताया कि, ” प्रदेश में फसलें, मकान, पशु हानि के साथ सड़कों की क्षति के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। इस स्थिति में लोगों को उनके घरों से रेस्क्यू कर राहत शिविरों में पहुंचाया गया। जनहानि न हो इसके प्रयास किए गए और इसमें सफलता भी मिली। प्रारंभिक तौर पर जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक लगभग साढ़े नौ हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।”

चौहान के मुताबिक, ” नुकसान का सर्वे निरंतर जारी है और ज्यादा नुकसान की स्थिति भी सामने आ सकती है। राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों को ज्यादा से ज्यादा सहायता दी है। आगे भी राहत पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। ”

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीमा और राहत राशि से नुकसान की भरपाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि सीहोर, रायसेन, होशंगाबाद, हरदा, देवास समेत इन्दौर, आगर-मालवा, भोपाल और छिंदवाड़ा में औसत से 26 से 39 प्रतिशत तक ज्यादा बारिश अगस्त माह में दर्ज की गई। अतिवर्षा और बाढ़ से 24 जिलों में लगभग 11 लाख 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों का नुकसान हुआ है और करीब 11 लाख 34 हजार किसान प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही लगभग 60 हजार मकान बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए। सरकार ने फौरी राहत के लिए पूरे प्रयास किए हैं। अभी भी लोगों को राहत की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री चौहान ने केन्द्रीय दल से प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के विस्तृत निरीक्षण और प्रभावित व्यक्तियों से मुलाकात और चर्चा के बाद क्षति की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आग्रह किया है।

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