April 16, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

मप्र में लव जिहाद के खिलाफ ‘धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक’ को कैबिनेट की मंजूरी

भोपाल, 19 मई (आईएएनएस)| मध्यप्रदेश में कोरोना के बीच आम आदमी की जिंदगी को पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। तमाम एहतियात बरतते हुए सरकारी, गैर सरकारी और औद्योगिक गतिविधियों के फिर गति पकड़ने के आसार बनने लगे हैं। राज्य में कोरोना महामारी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन चार में सरकार ने खास रणनीति बनाई है। अब राज्य में कोरोना की स्थिति के चलते सिर्फ रेड और ग्रीन जोन ही होगा। ग्रीन जोन में लगभग आम आदमी की जिंदगी पुरानी स्थिति की तरफ लौटने लगेगी, क्योंकि इन इलाकों में सभी गाइड लाइनों को पूरा करते हुए तमाम गतिविधियां शुरू होने लगी है। राज्य में कुल 52 जिले हैं, जिसमें से सिर्फ दो जिले इंदौर व उज्जैन के संपूर्ण रेड जोन में रखे गए है। इसके अलावा भोपाल, बुरहानपुर, जबलपुर, खंडवा व देवास के नगर पालिक निगम क्षेत्र, मंदसौर , धार, कुक्षी व नीमच के नगर पालिका क्षेत्र यह रेड जोन में है। शेष पूरा प्रदेश ग्रीन जोन में है। दोनों ही जोन में स्कूल, कलेज, कोचिंग, प्रशिक्षण संस्थान, होटल, रेस्टोरेंट, हस्पिटेलिटी सेवाएं, सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थियेटर्स, बार, ऑडिटोरियम प्रतिबंधित बंद है। इसके साथ सामुदायिक कार्यक्रम, सभी प्रकार के सामाजिक, राजनैतिक, खेलकूद, मनोरंजन, अकादमिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आयोजन नहीं हो सकेंगे। सभी धार्मिक स्थल, पूजा स्थल तथा धार्मिक सभाएं प्रतिबंधित की गई है। ग्रीन जोन में पाबंदी वाले क्षेत्रों को छोड़कर सभी दुकानें एवं बाजार खुले खुलने लगे है, सब्जी मंडियां मंडियों में भी फिर रौनक लौटने को है, निजी व शासकीय कार्यालय पूरी क्षमता से चलेंगे तथा निजी वाहनों से लोग आवागमन किया जा सकेगा। यह स्थिति पटरी पर लौटती जिंदगी की तरफ संकेत दे रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सेामवार की रात को प्रदेश की जनता के नाम दिए संदेश में कहा, "कोरोना केा रोकने के लिए सभी सतर्क रहने की जरुरत है। इसके चलते सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थल पर मास्क पहनना अनिवार्य होगा, इन स्थानों पर थूकने पर जुर्माना लगाया जाएगा, फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा, विवाह में अधिकतम 50 लोग शामिल हो सकेंगे, अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 लोग जा सकेंगे, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना, पान, तम्बाकू, गुटखा खाना प्रतिबंधित होगा।" उन्हेंने कहा, "दुकानों पर ग्राहकों के बीच दो गज की दूरी रखना अनिवार्य होगा तथा एक समय में दुकान पर पांच से अधिक लोग नहीं रह सकेंगे। सभी कार्य स्थलों के प्रवेश द्वार एवं प्रस्थान द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग, हैण्डवाश और सेनेटाईजर की व्यवस्था, पूरे कार्य-स्थल पर नियमित सेनेटाईजेशन तथा लंच ब्रेक आदि में फिजिकल डिस्टेंसिंग अनिवार्य होगी।" राज्य में नई व्यवस्था के चलते मंगलवार को बाजारों में रौनक दिखने लगी है, सुबह सात बजे से रात सात बजे तक दुकानें खुली रहेंगी और लोग शर्तों का पालन करते हुए आवाजाही कर रहे हैं। राज्य के रेड जोन केा छोड़कर ग्रीन जोन में शराब और भांग की दुकानें भी खुलने लगी है। वहीं शराब कारोबारियों ने लायसेंस फीस में कटौती किए जाने की मांग को लेकर गृहमंत्री डा नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की है। गृहमंत्री डॉ. मिश्रा ने रेड और ग्रीन जोन का ब्यौरा देते हुए बताया, "ग्रीन जोन में सब कुछ खुल गया है मगर रेड जोन में प्रतिबंधात्मक है। संबंधित जिलों की स्थिति को देखते हुए ही रेड और ग्रीन जोन तय किए गए है।"

भोपाल, 26 दिसम्बर | मध्य प्रदेश में लव जिहाद को रोकने के लिए मप्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2020 को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इस विधेयक को आगामी विधानसभा के सत्र में पेश किया जाएगा। इस कानून के तहत जोर-जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन कर शादी करने वालों को अधिकतम 10 साल की सजा और एक लाख रुपये के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है।

आधिकारिक तौर पर मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ‘मप्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2020’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस कानून में धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए है। इस कानून के मुताबिक किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रलोभन देकर, धमकाकर, धर्म परितर्वन कराने को गैर कानूनी माना गया है।

राज्य के गृहमंत्री डा नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि कोई भी व्यक्ति दूसरे का प्रलोभन,धमकी,बल,दुष्प्रभाव, विवाह के नाम पर अथवा अन्य कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकेगा। कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन किए जाने का दुष्प्रेरण अथवा षड़यंत्र नहीं कर सकेगा।

इस अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि तय प्रावधानों का उल्लंघन कर धर्म परिवर्तन करनो पर एक साल से पांच साल की सजा और 25 हजार रुपए का अर्थदंड दिया जाएगा। वहीं महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति व जनजाति के धर्म परिवर्तन किए जाने पर दो साल से 10 साल तक की सजा और 50 हजार रुपए का अर्थदंड हेागा। इसके साथ ही धर्म छिपाकर धर्म परिवर्तन कराने पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड और तीन से 10 साल तक की सजा होगी।

कैबिनेट में पारित किए गए विधेयक में तय किया गया है कि दो या उससे अधिक लोगों का सामूहिक धर्म परितर्वन कराने पर पांच से 10 साल तक की सजा और एक लाख रुपये का अर्थदंडहोगा। वहीं धर्म परितर्वन केा लेकर दर्ज होने वाला अपराध सं™ोय और गैर जमानती होगा, इस मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय में ही हो सकेगी।

विधेयक में तय किया गया है कि धर्म परिवर्तन के बाद दंपति का संतान पिता की संपत्ति का उत्तराधिकारी होगा और महिला व बच्चे को भरण पोषण का अधिकार हेागा। इसके साथ ही धर्म परितर्वन कराने वाली संस्था और संगठन से जुड़े लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होगी और उसके खिलाफ व्यक्ति के समान ही कारावास और अर्थदंड का प्रावधान है।

इस विधेयक में लव जिहाद जैसे शब्द का उल्लेख नहीं है। फिर भी तय किया गया है कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले को 60 दिन पहले जिला दंडाधिकारी को सूचना आवश्यक तौर पर देना होगी। सूचना न देने पर तीन से पांच साल की सजा और 50 हजार रुपए का जुमार्ना हेागा।

बताया गया है कि कैबिनेट में पारित किए गए इस विधेयक को 28 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के सत्र में पेश किया जाएगा। इस अधिनियम के अस्तित्व में आते ही मप्र धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 निरासित हो जाएगा।

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