जहाँ शिफ्ट में काम करना पहले से ही हृदय रोगों के जोखिम से जुड़ा हुआ माना जाता है, वहीं एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि केवल दिन के समय भोजन करने से इन जोखिमों से बचा जा सकता है।
अमेरिका के मैस जनरल ब्रिघम और ब्रिटेन के साउथैम्प्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया कि नींद के समय पर अब तक ज्यादा ध्यान दिया जाता रहा है, लेकिन हृदय स्वास्थ्य के लिहाज से भोजन के समय का प्रभाव कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
पहले के अध्ययनों में यह सामने आ चुका है कि रात की शिफ्ट में काम करने से शरीर की आंतरिक घड़ी (सर्कैडियन रिद्म) के गड़बड़ाने के कारण हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
इस अध्ययन में पाया गया कि रात की शिफ्ट के दौरान काम करने पर ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम के मार्कर्स, प्लास्मिनोजेन एक्टिवेटर इनहिबिटर-1 (जो रक्त के थक्के बनने का जोखिम बढ़ाता है), और ब्लड प्रेशर जैसे हृदय रोग के संकेतक बढ़ जाते हैं।
हालांकि, जिन प्रतिभागियों ने केवल दिन के समय भोजन किया, उनमें ये जोखिम समान रहे और नहीं बढ़े।
शोधकर्ताओं की टीम ने कहा, “रात के समय भोजन से बचना या उसे सीमित करना उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो रात में काम करते हैं, अनिद्रा से पीड़ित हैं, नींद-जागने के चक्र में गड़बड़ी का अनुभव करते हैं, या बार-बार टाइम ज़ोन बदलते हैं।” यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में 20 स्वस्थ युवाओं को शामिल किया गया, जिन्हें दो सप्ताह तक किसी भी खिड़की, घड़ी या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तक पहुंच नहीं दी गई, ताकि उनका शरीर समय का अनुमान न लगा सके।
इन्हें “कॉनस्टेंट रूटीन प्रोटोकॉल” नामक प्रयोगशाला की सेटिंग में रखा गया, जहाँ 32 घंटे तक हल्की रोशनी में जागते रहकर, एक समान पोजिशन में बैठे-बैठे, हर घंटे एक जैसे स्नैक्स खाने को दिए गए।
इसके बाद उन्हें कृत्रिम रात की शिफ्ट की स्थिति में रखा गया, और दो समूहों में बांटा गया — एक समूह को रात में भोजन कराया गया (जैसा कि आमतौर पर रात की शिफ्ट वाले करते हैं), जबकि दूसरे को केवल दिन में भोजन दिया गया।
ध्यान देने योग्य बात यह रही कि दोनों समूहों को समान रूप से झपकी लेने का मौका मिला, इसलिए परिणामों में कोई भी अंतर नींद के समय की वजह से नहीं था।
मुख्य शोधकर्ता और साउथैम्प्टन विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर सारा चेलेप्पा ने कहा, “हमारे अध्ययन में हर संभव कारक को नियंत्रित किया गया, जिससे हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि यह बदलाव भोजन के समय की वजह से आया है।”
हालांकि दीर्घकालिक प्रभावों को जानने के लिए और शोध की जरूरत है, लेकिन टीम का मानना है कि परिणाम “उत्साहजनक” हैं और यह सुझाव देते हैं कि केवल भोजन के समय में बदलाव करके भी स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सकता है।


