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September 15, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

गोवा : लैराई देवी मंदिर में भगदड़, 6 श्रद्धालुओं की मौत, कई घायल

Lairai devi temple : गोवा के प्रसिद्ध लैराई देवी मंदिर में शनिवार तड़के हुई भगदड़ ने आस्था के महोत्सव को मातम में बदल दिया। मंदिर में सदियों पुरानी रस्म ‘धोंड’ के आयोजन के दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई, जिसमें अब तक 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है और 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

ढलान और भीड़ ने बढ़ाई मुश्किलें
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर की ओर जाने वाले एक ढलान पर अचानक भीड़ का संतुलन बिगड़ गया, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई। स्थानीय लोग और मंदिर के स्वयंसेवक तत्काल मदद के लिए आगे आए और लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की।

घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने एक्स पोस्ट के जरिए कहा, “आज सुबह शिरगांव के लैराई जात्रा में हुई दुखद भगदड़ से मैं बहुत दुखी हूं। मैं घायलों से मिलने अस्पताल गया और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। मैं व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहा हूं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे बात कर स्थिति का विस्तृत जायजा लिया और केंद्र की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

रास्ते में तोड़ा दम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छह घायलों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया। कुछ घायलों का इलाज पास के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में चल रहा है, जो मंदिर से लगभग 6-7 किलोमीटर दूर है, जबकि कुछ को जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, फिर भी हादसा
पुलिस के अनुसार, जात्रा के लिए लगभग 1,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और ड्रोन के जरिए भीड़ की निगरानी की जा रही थी। बावजूद इसके, स्थिति को संभालने में प्रशासन विफल रहा।

पुलिस का बयान
उत्तर गोवा के पुलिस अधीक्षक अक्षत कौशल ने पुष्टि करते हुए कहा, “श्रीगाओ में लैराई देवी मंदिर में हुई भगदड़ में छह लोगों की मौत हो गई और 15 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।”

स्थिति पर नजर
फिलहाल प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और राहत कार्य को प्राथमिकता दी है। स्थिति पर नजर रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे हुए हैं।

क्या है ‘धोंड’ रस्म?

उत्तर गोवा के शिरगांव में स्थित लैराई देवी मंदिर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह अपने विशिष्ट स्थापत्य और अद्वितीय परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर उत्तर और दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली के अनूठे मेल का उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसकी भव्यता और आस्था, दोनों ही श्रद्धालुओं को गहराई से आकर्षित करती हैं।

शिरगाव जात्रा: आस्था की अग्नि परीक्षा

हर वर्ष मई महीने में आयोजित होने वाली शिरगाव जात्रा इस मंदिर की पहचान है। यह गोवा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह जात्रा विशेष रूप से आग पर चलने की परंपरा, जिसे स्थानीय रूप से धोंड कहा जाता है, के लिए प्रसिद्ध है।

भक्त इस पर्व के लिए व्रत रखते हैं, और कई दिन पहले से मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी करते हैं। जात्रा के दिन, वे अग्निकुंड के जलते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं — यह एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसे देवी लैराई के प्रति समर्पण और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

सांस्कृतिक उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम

शिरगांव जात्रा के दिन केवल अग्नि पर चलना ही मुख्य आकर्षण नहीं होता, बल्कि मौलिंगम सहित आसपास के गांवों के लोग पूरे दिन देवी लैराई को समर्पित धार्मिक अनुष्ठानों और प्रसाद वितरण में भी भाग लेते हैं।

गोवा पर्यटन विभाग के अनुसार, यह त्योहार स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम है।

जैसे-जैसे आधी रात करीब आती है, श्रद्धालुओं की भक्ति एक नए जोश में बदल जाती है। मंदिर के भीतर एक विशिष्ट गोलाकार नृत्य का आयोजन होता है, जिसमें ढोल की थाप पर लाठियों की टकराहट के साथ सैकड़ों भक्त सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं। यह दृश्य न केवल आध्यात्मिक भावनाओं को प्रकट करता है, बल्कि शारीरिक समर्पण और सामूहिक एकता का भी प्रतीक बन जाता है।

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