राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बुधवार को एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भोपाल में हिंदू छात्राओं को जानबूझकर निशाना बनाकर उनके साथ यौन शोषण किया गया है।
यह बयान उस हाई-प्रोफाइल मामले के संदर्भ में आया है जिसमें कथित ‘लव जिहाद’ गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। कुछ सप्ताह पहले सामने आए इस मामले में भोपाल के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज की आधा दर्जन छात्राओं ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम समुदाय से जुड़े एक गिरोह ने उन्हें बहलाकर उनके साथ यौन शोषण किया।
NHRC ने शुरू की जांच
प्रियंक कानूनगो ने जानकारी दी कि जैसे ही यह मामला NHRC के संज्ञान में आया, आयोग की एक टीम भोपाल भेजी गई, जो दो दिनों तक इस मामले की जांच करेगी। उन्होंने बताया कि अभी तक आधा दर्जन पीड़िताओं ने शिकायत की है, लेकिन पीड़िताओं की संख्या और बढ़ने की आशंका है।
“संगठित अपराध की आशंका”
कानूनगो ने IANS को बताया:
“हमें प्राप्त प्रारंभिक जानकारी से यह स्पष्ट है कि हिंदू छात्राओं को टारगेट कर यौन उत्पीड़न किया गया है। न केवल उनके साथ दुष्कर्म किया गया, बल्कि उनकी अश्लील वीडियो बनाई गईं, उन्हें नशा दिया गया और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर भी किया गया।”
उन्होंने कहा कि NHRC सभी पीड़ितों और उनके परिजनों से अपील करता है कि वे आगे आकर शिकायत दर्ज कराएं। उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
भोपाल पुलिस की भूमिका पर सवाल
NHRC सदस्य ने भोपाल पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए।
“हैरानी की बात यह है कि कॉलेज के पास ही थाने की दूरी केवल 500 मीटर है, फिर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसा लगता है कि पुलिस ने कुछ साक्ष्यों को नष्ट किया है। हम इस पूरे मामले की गहराई से जांच करेंगे और अगले दो दिनों में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे,” उन्होंने कहा।
अब तक की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिन्होंने पहचान छिपाकर छात्राओं के साथ बलात्कार किया और वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया।
मामले के मुख्य आरोपी फरहान अली को 3 मई को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था।


