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May 28, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

मध्यप्रदेश – बालाघाट में दो सप्ताह में दूसरी बार बाघ का हमला, आदिवासी युवक की मौत

Balaghat News – बालाघाट जिले से एक और दर्दनाक बाघ हमले की खबर सामने आई है। दो सप्ताह के भीतर यह दूसरा जानलेवा हमला है।

शुक्रवार तड़के, कटंगी थाना क्षेत्र में 35 वर्षीय आदिवासी युवक अनिल, पुत्र आनंदन सिंह भालावी, की बाघ के हमले में मौत हो गई। उसका क्षत-विक्षत शव उसके गांव कछार के समीप जंगल में मिला।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डाबर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बाघ ने अनिल के शरीर का पिछला हिस्सा खा लिया था, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि बाघ उसे घसीटकर जंगल के अंदर ले गया और वहां मार डाला।

यह घटना सोनवानी जंगल के पास हुई, जो बाघों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है, लेकिन यह क्षेत्र संरक्षित वन या अभयारण्य के अंतर्गत नहीं आता है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अनिल सुबह-सुबह जंगल में महुआ फूल और तेंदूपत्ता इकट्ठा करने गया था। ये दोनों चीजें आदिवासी समुदाय के लिए अतिरिक्त आय का प्रमुख स्रोत हैं, विशेषकर बीड़ी बनाने में तेंदूपत्ते का उपयोग होता है।

हमले के बाद बाघ घने जंगल में भाग गया।

सोनवानी क्षेत्र में जैव विविधता और बाघों की अच्छी संख्या होने के बावजूद यह क्षेत्र संरक्षित घोषित नहीं किया गया है, जिससे संरक्षण प्रयासों को लेकर गंभीर चिंता उठ रही है।

इससे पहले, 3 मई को टीरोड़ी थाना क्षेत्र में 50 वर्षीय आदिवासी किसान प्रकाश पाने पर भी बाघ ने हमला किया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी।

लगातार हो रहे हमलों से गुस्साए ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले दो महीनों से बाघ की गतिविधियों की सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में सुरक्षा के सख्त उपायों की मांग की है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

घटना के बाद वन विभाग ने बाघ को पकड़कर भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित कर दिया।

साल 2025 की शुरुआत से अब तक बाघ और मानव के बीच संघर्ष के कम से कम छह मामले सामने आ चुके हैं — जिनमें चार बांधवगढ़ और दो बालाघाट में हुए हैं।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में शिकार की कमी के चलते बाघ मानव बस्तियों की ओर बढ़ते हैं और अक्सर मवेशियों या इंसानों पर हमला कर देते हैं। ये बाघ आमतौर पर पेंच-कान्हा कॉरिडोर में घूमते रहते हैं और कभी-कभी बफर जोन तक पहुंच जाते हैं।

अधिकारियों का अनुमान है कि इस क्षेत्र में करीब 30 से 35 बाघ हैं और अनिल पर हमला करने वाला बाघ संभवतः इन्हीं में से एक था।

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