Kanha Tiger Reserve – कान्हा राष्ट्रीय अभ्यारण्य में वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। ताजा मामला मुण्डीदादर क्षेत्र का है, जहां सुकुमा नदी के पास दो पत्थरों के बीच एक 10 वर्षीय मादा बाघ का शव बरामद किया गया है। अनुमान है कि हाल ही में हुई भारी बारिश के चलते भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में आकर मादा बाघ दो चट्टानों के बीच फंस गई और वहीं उसकी मौत हो गई।
बाघ की मौत की खबर मिलते ही वन विभाग और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर पोस्टमार्टम और पंचनामा की कार्रवाई पूरी की। शव का अंतिम संस्कार भी तुरंत कर दिया गया। मौके पर डॉग स्क्वायड की मदद से जाँच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि मादा बाघ के शरीर के सभी अंग सुरक्षित हैं।
डॉ. संदीप अग्रवाल और डॉ. आशीष वैद्य द्वारा किए गए पोस्टमार्टम के बाद नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पंचनामा की प्रक्रिया NTCA के अधिकारी, तहसीलदार, सरपंच और उपसरपंच की मौजूदगी में की गई।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक मात्र पांच महीनों के भीतर कान्हा टाइगर रिजर्व में 6 बाघों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रत्येक बार बाघ की मौत के बाद विभागीय स्तर पर जांच की रस्मअदायगी तो होती है, लेकिन जांच रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की जाती, जिससे यह संदेह और गहराता है कि कहीं जांच प्रक्रिया केवल लीपापोती का जरिया तो नहीं बन चुकी।
वन्य जीवों की लगातार हो रही मौतों के चलते यह आवश्यक हो गया है कि जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। केवल औपचारिक कार्रवाइयों से वन्य जीव संरक्षण संभव नहीं होगा। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कान्हा टाइगर रिजर्व जैसे महत्वपूर्ण अभ्यारण्य में वन्य जीवन का संतुलन गहराई से प्रभावित हो सकता है।


