छतरपुर जिले के एक छोटे से गांव बिलहरी में 17 वर्षीय पंकज प्रजापति का सपना था कि एक दिन कलेक्टर बनेगा। पढ़ाई में होशियार था, हाल ही में 12वीं में स्कूल टॉपर बना था। लेकिन 8 जून की सुबह, सिर्फ इसलिए उसे गोली मार दी गई क्योंकि उसने राशन दुकान में गाली देने से मना किया। अब उसका सपना, उसकी मेहनत और उसका जीवन – सब कुछ एक बंदूक की गोली में खत्म हो गया।
घटना कैसे हुई: राशन लेने गया था पंकज, हुआ विवाद
घटना 8 जून की सुबह करीब 9 बजे की है। पंकज अपने चचेरे भाई करण के साथ राशन लेने सरकारी दुकान पर गया था। राशन ज्यादा होने के कारण वे बोरियां बाहर निकाल रहे थे, तभी दुकान में मौजूद रामसेवक अरजरिया ने गाली देकर कहा – “जल्दी निकलो।” पंकज ने विरोध किया और कहा, “आप पढ़े-लिखे हैं, गाली से बात मत करो।”
इसके बाद बीजेपी किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष प्रवीण पटेरिया मौके पर आया, गाली दी, फिर चप्पल से मारा। विवाद बढ़ा तो प्रवीण, उसका भाई नवीन और रामसेवक तीनों ने मिलकर पंकज को अंदर ले जाकर बेरहमी से पीटा। पंकज जैसे-तैसे घर लौटा लेकिन पिता बृज गोपाल प्रजापति के साथ वापस शिकायत करने पहुंचा, तभी प्रवीण ने छत से गोली चला दी। गोली पंकज की जांघ में लगी और खून बहने से उसकी मौत हो गई।
पिता बोले: बेटे ने मेरी गोद में कहा – अब कुछ नहीं बचा पापा
पंकज के पिता बृज गोपाल रोते हुए कहते हैं, “मेरे बेटे को मेरी आंखों के सामने गोली मारी गई। मैंने उसे गोद में उठाया, अस्पताल तक ले गया, लेकिन रास्ते में उसने कहा, ‘पापा अब सब अंधेरा दिख रहा है, अब मैं नहीं बचूंगा।’”
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद 5 घंटे तक थाने में बैठने के बावजूद एफआईआर नहीं लिखी गई। जब चक्काजाम किया गया, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।
प्रवीण पटेरिया: बीजेपी नेता और विवादित चेहरा
मुख्य आरोपी प्रवीण पटेरिया बीजेपी किसान मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष है। उसका भाई नवीन पटेरिया आरएसएस से जुड़ा हुआ है और तीसरा आरोपी रामसेवक राशन वितरण में लगा कर्मचारी है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों के घर आमने-सामने हैं और वारदात के बाद से ताले लगे हैं।
पुलिस ने हत्या और SC/ST एक्ट में मामला दर्ज किया है। एसडीओपी अमित मेश्राम ने बताया कि प्रवीण को हथियार समेत गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य दो आरोपी अभी फरार हैं।
पंकज: पढ़ाई में होशियार, घर की जिम्मेदारी भी निभाता था
पंकज ने इस साल 12वीं में 80% अंक हासिल किए थे। गणित उसका पसंदीदा विषय था। शिक्षक उसकी तारीफ करते नहीं थकते थे। घर की आर्थिक स्थिति खराब थी, मां की बचपन में मौत हो गई थी। दादी गिरजा बाई ने उसे पाला था। पिता का दो बार ऑपरेशन हो चुका है। ऐसे में पंकज पढ़ाई के साथ मिट्टी के बर्तन बनाने, कंडे लाने जैसे सारे काम खुद करता था।
पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में
गांव के लोगों का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर पंकज का बयान नहीं लिया, जबकि गोली लगने के बाद वह बात कर रहा था। दैनिक भास्कर की टीम की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि पंकज बयान देने की हालत में नहीं था, जबकि परिजन बार-बार थाने से बाहर जा रहे थे, इस वजह से एफआईआर में देरी हुई।


