Jabalpur News Today। जरा सोचिए… अगर अचानक आपके फोन पर कोई कॉल आए और कहा जाए कि आपका मोबाइल नंबर, आधार और बैंक अकाउंट मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है, और अगर आपने तुरंत बैंक खाते का वेरिफिकेशन नहीं कराया तो आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा—तो क्या आप घबरा जाएंगे?
ऐसा ही हुआ 61 वर्षीय शशि शर्मा के साथ, जिन्होंने डर के चलते अपने रिटायरमेंट के 59 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
कैसे रचा गया धोखाधड़ी का जाल?
10 जनवरी 2025 को शशि शर्मा के मोबाइल पर एक कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को सरकारी एजेंसी से बताया और कहा कि—
“आपके नाम से फर्जी आधार कार्ड बनाकर नरेश गोयल नामक व्यक्ति करोड़ों का लेनदेन कर रहा है। कैनरा बैंक नासिक में आपके नाम पर एक खाता खुला है जिसमें 2.5 करोड़ रुपए हैं। अब आपको नेशनल सिक्योरिटी लॉ के तहत गिरफ्तार किया जाएगा।”
डरी हुई शशि शर्मा ने यह बात अपने पति चंद्रकेश शर्मा (सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी) को बताई। कॉलर ने उन्हें वेरिफिकेशन के नाम पर बैंक में जाकर RTGS करने को कहा। उन्होंने 10 जनवरी से 20 जनवरी के बीच तीन बार में 59 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
कॉलर बार-बार कहता रहा:
“यह सिर्फ वेरिफिकेशन के लिए है, सारा पैसा बाद में वापस कर दिया जाएगा।”
जब कॉल बंद हुआ, तब टूटी नींद
22 जनवरी को कॉल आना बंद हुआ, तब जाकर शशि शर्मा ने अपनी बेटी से पूरी बात साझा की। बेटी ने तुरंत बताया कि ये साइबर ठगी का मामला है। इसके बाद दंपत्ति सीधे साइबर थाना, जबलपुर पहुंचे और शिकायत दर्ज करवाई।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई: दो ठग राजस्थान से गिरफ्तार
शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच और साइबर टीम ने तत्काल जांच शुरू की। फोन नंबर और बैंक खातों की लोकेशन जयपुर, राजस्थान निकली। एक विशेष टीम ने जयपुर से दो ठग – मुकेश चौधरी और दीपक कुमावत को गिरफ्तार किया। इनके पास से मोबाइल फोन, चेक बुक, ATM कार्ड और नकद रुपये बरामद हुए हैं।
दोनों आरोपियों ने पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और एक संगठित गिरोह चलाते हैं जो बुजुर्गों को सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर ठगी करते हैं। पूछताछ में इनके और साथी भी सामने आ सकते हैं।
जांच में क्या निकला: कैसे की गई ठगी?
14 जनवरी: ₹15 लाख ट्रांसफर
17 जनवरी: ₹32.65 लाख ट्रांसफर
20 जनवरी: ₹9.98 लाख ट्रांसफर


