September 1, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

आंध्र प्रदेश : टीटीडी ने 4 गैर-हिंदू कर्मचारियों को निलंबित किया

Tirupati Balaji Temple Darshan

Tirupati Balaji Temple Darshan। आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) (वेंकटेश्वर मंदिर का आधिकारिक संरक्षक) ने 4 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। ये सभी गैर-हिंदू थे और आरोप है कि अन्य धर्मों का पालन करते हैं, जो संस्था के नियमों का उल्लंघन है। टीटीडी ने यह कार्रवाई अपनी सतर्कता विभाग (विजिलेंस डिपार्टमेंट) की रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर की है। निलंबित कर्मचारियों में डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (क्वालिटी कंट्रोल) बी. एलिजर, बीआईआरआरडी अस्पताल की स्टाफ नर्स एस. रोसी, बीआईआरआरडी अस्पताल की ग्रेड-1 फार्मासिस्ट एम. प्रेमावती और एसवी आयुर्वेद फार्मेसी की डॉ. जी. असुंथा शामिल हैं।

टीटीडी के मुताबिक, इन कर्मचारियों ने हिंदू धार्मिक संगठन में काम करते हुए संस्था के आचार संहिता का पालन नहीं किया और अपने कर्तव्यों का निर्वहन गैर-जिम्मेदाराना ढंग से किया। टीटीडी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन कर्मचारियों पर अन्य धर्मों का पालन करने का आरोप है, जो एक हिंदू धार्मिक संस्था के कर्मचारियों के लिए निर्धारित नियमों के खिलाफ है। सतर्कता विभाग की जांच और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद इन चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई टीटीडी के नियमों के अनुसार की गई है।

टीटीडी ने स्पष्ट किया कि वेंकटेश्वर मंदिर के प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे संस्था के धार्मिक मूल्यों और आचार संहिता का पूरी तरह पालन करें। इन कर्मचारियों पर लगे आरोपों ने मंदिर प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। निलंबन के बाद इन कर्मचारियों के खिलाफ आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी। यह घटना तिरुपति में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि टीटीडी एक प्रमुख हिंदू धार्मिक संस्था है, जो देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

बता दें कि पिछले साल टीडीपी ने दावा किया था कि प्रसिद्ध वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन करने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) की ओर से उपलब्ध कराए गए घी के नमूनों में गुजरात के पशुधन प्रयोगशाला में मिलावट की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट में दिए गए घी के नमूने में ‘पशु की चर्बी और मछली के तेल की मौजूदगी का दावा किया गया था। घी के नमूने 9 जुलाई 2024 को लिए गए थे और प्रयोगशाला रिपोर्ट 16 जुलाई को सामने आई थी। इसे लेकर काफी हंगामा भी मचा था।

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