Congress leader Vivek Tankha, 4 अगस्त — कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने सोमवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर “मध्यप्रदेश डकैती और अपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम (MPDAA), 1981” को समाप्त करने की मांग की है।
उन्होंने अपने पत्र में सरकार के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि चंबल घाटी (बीहड़) से सभी डकैतों का खात्मा हो चुका है और 2007 के बाद किसी नए डकैत के सक्रिय होने की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में अब यह कानून अपना उद्देश्य पूरा कर चुका है और इसके गलत इस्तेमाल की आशंका को रोकने के लिए इसे समाप्त कर देना चाहिए।
तन्खा ने लिखा: “कोई भी कानून उस समय की सामाजिक, आर्थिक और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए बनाया जाता है। जब वह कानून अपना उद्देश्य पूरा कर ले, तो उसमें संशोधन या उसे समाप्त करना जरूरी हो जाता है।”
कांग्रेस नेता ने इस कानून के दुरुपयोग को लेकर चिंता जाहिर करते हुए लिखा कि सरकार के अनुसार चंबल में अब कोई डकैत नहीं है, फिर भी 2020 से 2023 के बीच इस कानून के तहत 900 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं।
उन्होंने कहा: “इस कानून का गलत इस्तेमाल सामाजिक विद्वेष को बढ़ावा दे रहा है, न्यायपालिका और सरकार पर अतिरिक्त बोझ बन रहा है। कई सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों ने भी इस कानून में बदलाव की सलाह दी है।”
तन्खा ने यह भी याद दिलाया कि भिंड से पूर्व कांग्रेस विधायक मेवाराम जाटव ने 2023 में विधानसभा में इस कानून को खत्म करने का प्रस्ताव भी रखा था।
कानून का प्रभाव: विवेक तन्खा ने पत्र में यह भी लिखा कि इस कानून के व्यापक प्रावधानों के कारण कई बार निर्दोष युवाओं को झूठे मामलों में फंसा दिया जाता है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है।
अंत में उन्होंने लिखा: “आपकी प्रशासनिक क्षमता और कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता को देखते हुए मुझे उम्मीद है कि आप इस सुझाव पर विचार करते हुए उचित निर्णय लेंगे।”
क्या है MPDAA 1981?
यह कानून 1981 में मध्यप्रदेश सरकार ने चंबल और अन्य डकैती व अपहरण प्रभावित क्षेत्रों के लिए बनाया था। इसके तहत विशेष क्षेत्र घोषित किए जा सकते हैं, तेज सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित की जा सकती हैं, और अवैध संपत्ति को जब्त करने की व्यवस्था है।


