June 13, 2026
सी टाइम्स
क्राइमप्रादेशिक

लापता – जबलपुर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस, इंदौर में रहकर सिविल जज बनने की तैयारी कर रही अर्चना तिवारी के लापता होने के 96 घंटे बाद भी नहीं मिला कोई सुराग

Archana tiwari missing news – इंदौर में रहकर सिविल जज बनने की तैयारी कर रही कटनी की 28 वर्षीय युवती अर्चना तिवारी चलती ट्रेन से रहस्यमयी तरीके से लापता हो गई है। घटना को हुए अब 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अर्चना का कोई सुराग नहीं मिला है। परिजन, रेलवे पुलिस और प्रशासन लगातार तलाश में जुटे हैं, वहीं पूरा जिला उनकी सुरक्षित घर वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है।

कैसे हुई घटना
7 अगस्त की शाम अर्चना तिवारी इंदौर से अपने गृहनगर कटनी लौटने के लिए नर्मदा एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 18233) के B3 कोच में सवार हुई थीं। वह रक्षाबंधन पर घर आ रही थीं। 8 अगस्त की सुबह ट्रेन कटनी साउथ स्टेशन पहुँची, लेकिन अर्चना उसमें मौजूद नहीं थीं। हैरानी की बात यह रही कि उनका बैग उनकी सीट पर रखा मिला, जबकि मोबाइल फोन बंद था।

तलाश के दौरान अर्चना का बैग उमरिया रेलवे स्टेशन पर मिला। आखिरी मोबाइल लोकेशन नर्मदापुरम के आसपास पाई गई, लेकिन उसके बाद फोन पूरी तरह स्विच ऑफ हो गया।

96 घंटे से जारी खोज अभियान
जीआरपी, आरपीएफ और परिजन मिलकर पिछले 96 घंटों से तलाश में जुटे हैं। इंदौर, नर्मदापुरम, उमरिया और कटनी जिलों की रेलवे पुलिस अलग-अलग इलाकों में जांच कर रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।

कौन हैं अर्चना तिवारी
कटनी जिले के मंगलनगर की रहने वाली अर्चना तिवारी पढ़ाई में हमेशा अव्वल रही हैं। उन्होंने LLB की पढ़ाई कटनी से और LLM की पढ़ाई जबलपुर से की। इसके बाद तीन साल तक जबलपुर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की। पिता के निधन के बाद उनके बड़े पिता बाबू प्रकाश तिवारी (जो खुद कटनी न्यायालय में वकील हैं) ने उन्हें सिविल जज की तैयारी के लिए इंदौर भेजा।

पिछले आठ महीनों से अर्चना इंदौर के सत्कार गर्ल्स हॉस्टल में रहकर कौटिल्य एकेडमी से कोचिंग ले रही थीं और खाली समय में कोर्ट की प्रैक्टिस भी करती थीं।

परिजनों की चिंता

परिजनों के मुताबिक, ट्रेन में बैठने से लेकर भोपाल पहुंचने तक करीब 2-3 बार उनकी मोबाइल पर बात हुई। लेकिन कटनी साउथ स्टेशन पहुंचने पर अचानक फोन बंद हो गया।

परिवार की बेचैनी बढ़ी तो भाई तत्काल स्टेशन पहुंचा, लेकिन ट्रेन में अर्चना नजर नहीं आईं और गाड़ी आगे बढ़ गई। पहले लगा कि शायद मोबाइल चोरी हो गया हो या अर्चना नींद में हों। इसी संशय में उमरिया में रह रहे मामा को कॉल किया गया और उनसे स्टेशन जाकर अर्चना की स्थिति देखने को कहा गया।

मामा जब स्टेशन पहुंचे तो नर्मदा एक्सप्रेस के एसी कोच B3 के बर्थ नंबर 3 पर सिर्फ अर्चना का बैग रखा था। घबराहट में पूरी ट्रेन में खोजबीन की गई, आस-पास के यात्रियों से पूछताछ हुई, लेकिन अर्चना का कोई सुराग नहीं मिला।

अभी तक गुत्थी उलझी हुई
अर्चना के रहस्यमयी तरीके से लापता होने की गुत्थी अभी सुलझने के बजाय और पेचीदा होती जा रही है। यह अब जांच का विषय है कि वह चलती ट्रेन से कैसे और किन परिस्थितियों में गायब हुईं।

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