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September 16, 2026
सी टाइम्स
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पृथ्वी की कक्षा में बृहस्पति का चांद ‘यूरोपा’ आ जाए तो क्या होगा? जानें क्या है ‘यूरोपा क्लिपर’ मिशन

नई दिल्ली, 13 जून । यह सोचने में ही रोमांच होता है कि अगर बृहस्पति का बर्फीला चंद्रमा यूरोपा अचानक पृथ्वी की कक्षा में आ जाए तो आसमान कैसा दिखेगा। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस बारे में विस्तार से दिलचस्प जानकारी देता है। नासा ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर यूरोपा की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए दिलचस्प जानकारी दी। एजेंसी के मुताबिक, ऐसी स्थिति में यूरोपा रात के आकाश में हमारे चंद्रमा से करीब पांच गुना अधिक चमकदार नजर आएगा। इसकी वजह इसकी बेहद चमकीली बर्फीली सतह है। यही कारण है कि यूरोपा वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अब नासा का ‘यूरोपा क्लिपर’ मिशन इस रहस्यमयी दुनिया के कई सवालों के जवाब तलाशने के लिए रवाना हो चुका है। नासा ने हाल ही में यूरोपा के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह बृहस्पति का चौथा सबसे बड़ा चंद्रमा है। आकार के लिहाज से यह पृथ्वी के चंद्रमा का लगभग 90 प्रतिशत है, लेकिन इसकी बर्फ से ढकी सतह सूर्य के प्रकाश को अधिक परावर्तित करती है। यही वजह है कि अगर यह पृथ्वी के आसपास होता तो इसकी चमक काफी ज्यादा दिखाई देती। वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी दिलचस्पी यूरोपा की सतह के नीचे मौजूद विशाल महासागर को लेकर है। माना जाता है कि मोटी बर्फ की परत के नीचे तरल पानी का एक विशाल समुद्र मौजूद है। पानी को जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से एक माना जाता है, इसलिए वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि क्या वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। इसी उद्देश्य से नासा ने ‘यूरोपा क्लिपर’ मिशन तैयार किया है। यह पहला ऐसा मिशन है जिसे विशेष रूप से यूरोपा का विस्तृत अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया है। स्पेस क्राफ्ट को बृहस्पति और उसके चंद्रमा की संरचना, बर्फीली सतह, महासागर और संभावित रहने योग्य वातावरण की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। यूरोपा क्लिपर को बृहस्पति तक पहुंचने के लिए लगभग 2.9 अरब किलोमीटर की यात्रा करनी होगी। मिशन अप्रैल 2030 में अपने गंतव्य तक पहुंचेगा। इसके बाद यह बृहस्पति की परिक्रमा करते हुए यूरोपा के करीब 49 बार फ्लाईबाई करेगा। हर बार इसके वैज्ञानिक उपकरण सक्रिय होकर महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाएंगे। स्पेस क्राफ्ट में नौ अल्ट्रा मॉडर्न वैज्ञानिक उपकरण और एक खास ग्रेविटी एक्सपेरिमेंट लगाया गया है। इनकी मदद से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या यूरोपा पर आज भी ऐसे हालात मौजूद हैं, जहां जीवन विकसित हो सकता है। यदि इस मिशन से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो यह पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

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