OBC reservation issue, 28 अगस्त। ओबीसी को पूर्ण 27 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए औपचारिक प्रस्ताव पारित करने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को कहा कि सरकार ने 10 सितंबर से पहले सभी पक्षों के अधिवक्ताओं के साथ बैठक करने का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की डे-टू-डे (प्रतिदिन) सुनवाई 23 सितंबर से शुरू करने जा रहा है और उससे पहले सरकार अधिवक्ताओं से मुलाकात करेगी, मुख्यमंत्री ने कहा।
इससे पहले दिन में मध्यप्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व ने सर्वसम्मति से एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया, जो आने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले राज्य की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति में निर्णायक बदलाव का संकेत देता है।
यह प्रस्ताव सभी प्रमुख दलों के समर्थन से पारित हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा कि लागू किए गए 14 प्रतिशत से आगे शेष 13 प्रतिशत कोटा एक समन्वित कानूनी रणनीति और न्यायिक पुष्टि के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा।
सुबह मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी भाजपा के साथ मिलकर आरक्षण के समर्थन में सहमति जताई।
मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद कहा— “ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सभी दल सर्वसम्मति से लोकतांत्रिक रूप से सहमत हैं।” उन्होंने इस सर्वसम्मति को राजनीतिक और संवैधानिक दायित्व करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे से संबंधित कई याचिकाएं लंबित हैं और मामला सब ज्यूडिस है।
सीएम यादव ने कहा— “सुप्रीम कोर्ट 23 सितंबर से प्रतिदिन सुनवाई शुरू करने वाला है। इसकी तैयारी में राज्य ने 10 सितंबर से पहले विधि विशेषज्ञों का संयुक्त सत्र बुलाया है, ताकि दलीलों में सामंजस्य रहे और ओबीसी वर्ग का कोई भी पात्र वर्ग आरक्षण से वंचित न रहे।”
उन्होंने आगे कहा— “हमने इसे पहले भी विधानसभा में दोहराया है और अब हम सब मिलकर इसे पूरा करने के लिए दृढ़संकल्पित हैं।” मुख्यमंत्री ने जोड़ा कि इस मामले से जुड़े सभी अधिवक्ता अपनी दलीलें प्रस्ताव की मंशा को ध्यान में रखकर पेश करेंगे।


