त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर रौनक बढ़ जाती है। कपड़े, गिफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स और सजावटी सामान की खरीदारी चरम पर रहती है। ऑनलाइन कंपनियां आकर्षक ऑफर्स और भारी डिस्काउंट देती हैं, जिनसे उपभोक्ता तेजी से ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स की ओर आकर्षित होते हैं। लेकिन इसी बीच साइबर अपराधी भी सक्रिय हो जाते हैं और भोले-भाले ग्राहकों को निशाना बनाते हैं।
भारतीय राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार, त्योहारों के दौरान ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में औसतन 35 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जाती है। सिर्फ साल 2023 में ही देशभर में साइबर फ्रॉड से जुड़े 14 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें लगभग 22 फीसदी मामले सीधे तौर पर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और यूपीआई पेमेंट से जुड़े थे।
कैसे होता है ऑनलाइन फ्रॉड?
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नकली वेबसाइट और ऐप: भारी डिस्काउंट और आकर्षक ऑफर दिखाकर लोगों से ऑर्डर बुक कराए जाते हैं, लेकिन सामान कभी पहुंचता ही नहीं।
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फिशिंग ईमेल और मैसेज: बैंक या ई-कॉमर्स कंपनी के नाम पर लिंक भेजकर पासवर्ड, कार्ड डिटेल्स और ओटीपी हासिल कर लिया जाता है।
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सोशल मीडिया स्कैम: व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम पर ‘फ्री गिफ्ट’ या ‘लकी ड्रॉ’ का झांसा देकर ग्राहकों से पैसे ऐंठे जाते हैं।
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क्यूआर कोड और यूपीआई ट्रिक: स्कैन करने या लिंक पर क्लिक करने से खाते से सीधा पैसा निकल जाता है।
बचाव के उपाय
साइबर सेल और विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सरल सावधानियां अपनाकर आप ऐसे धोखों से बच सकते हैं:
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खरीदारी सिर्फ भरोसेमंद और आधिकारिक वेबसाइट/ऐप से ही करें।
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किसी भी साइट या विज्ञापन पर 70-80% से ज्यादा डिस्काउंट दिखे तो सतर्क हो जाएं।
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पब्लिक वाई-फाई पर कभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन न करें।
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यूपीआई पेमेंट और क्यूआर कोड स्कैन करते समय पूरी तरह चौकन्ने रहें।
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ओटीपी, कार्ड नंबर और पिन किसी के साथ भी साझा न करें।
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धोखा होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
त्योहारों की खुशियों में बरतें डिजिटल सावधानी
त्योहार खुशियों और उमंग का समय होते हैं, लेकिन यह साइबर अपराधियों के लिए भी सुनहरा मौका बन जाते हैं। थोड़ी सी डिजिटल सावधानी और सतर्कता अपनाकर आप न केवल अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि त्योहार का आनंद भी बिना किसी तनाव के उठा सकते हैं।


