रांची, 3 जनवरी । भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने झारखंड सरकार की तरफ से पेसा कानून के संबंध में जारी अधिसूचना को आदिवासी संस्कृति की मूल भावना पर प्रहार बताया। उन्होंने कहा कि इस अधिसूचना से यह साफ जाहिर होता है कि राज्य सरकार चर्च के सामने नतमस्तक हो चुकी है।
उन्होंने शनिवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पेसा कानून से यह साफ जाहिर हो रहा है कि सरकार ईसाई धर्म के लोगों को वरीयता देने की कोशिश कर रही है। साथ ही आदिवासी समुदाय से आने वाले लोगों की मूल संस्कृति पर हमला कर रही है।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि पेसा कानून के संबंध में जारी अधिसूचना में यह साफ प्रावधान किया गया है कि अब ईसाई धर्म से जुड़ा व्यक्ति भी प्रधान का चुनाव लड़ सकता है। सरकार अपने इस फैसले से आदिवासी समुदाय की मूल संस्कृति पर हमला करने की कोशिश कर रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार चोर दरवाजे से यहां पर ईसाई धर्म के लोगों को वरीयता देकर आदिवासी समुदाय के लोगों की संस्कृति पर प्रहार कर रही है। यह अपने आप में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
प्रतुल शाह देव ने कहा कि पेसा कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि ईसाई धर्म अपना चुके आदिवासी व्यक्ति को सभी लाभ यथावत मिलते रहेंगे। इस दिशा में किसी भी प्रकार की तब्दीली नहीं की जाएगी। इससे यह साफ जाहिर है कि सरकार आदिवासियों के हितों के साथ समझौता करके ईसाई धर्म अपना चुके लोगों को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे शीर्ष पर रख रही है।


