July 28, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में धड़ल्ले से बेची जा रहीं नकली एनसीईआरटी किताबें, अभिभावकों में नाराजगी



डीडवाना-कुचामन, 4 अप्रैल । राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में नकली एनसीईआरटी किताबों की बिक्री का बड़ा मामला सामने आया है, जिससे छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बाजार में धड़ल्ले से ऐसी किताबें बेची जा रही हैं, जो देखने में असली एनसीईआरटी किताबों जैसी लगती हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता और मानकों में भारी अंतर पाया गया है।



स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इन नकली किताबों में 80 जीएसएम (ग्राम प्रति वर्ग मीटर) पेपर के इस्तेमाल का दावा किया गया है, लेकिन वास्तविकता में बेहद घटिया गुणवत्ता वाला अखबारी कागज उपयोग किया गया है। इन किताबों में न तो वाटरमार्क है और न ही मुद्रण संख्या या प्रकाशक की सही जानकारी दी गई है, जबकि असली एनसीईआरटी और राजस्थान पाठ्य पुस्तक मण्डल की किताबों में यह सभी सुरक्षा मानक मौजूद होते हैं।

असली किताबों में हर पेज पर एनसीईआरटी या आरएसटीबी का वाटरमार्क साफ दिखाई देता है और प्रिंटिंग की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, लेकिन नकली किताबों में न तो यह सुरक्षा फीचर्स हैं और न ही प्रिंटिंग मानक ठीक पाए गए हैं। इसके बावजूद इन किताबों को असली किताबों के बराबर कीमत पर बेचा जा रहा है, जिससे अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिले के सरकारी स्कूलों में अभी तक सभी छात्रों को मूल किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। इस कमी का फायदा उठाकर कुछ दुकानदार बाजार में नकली किताबें बेच रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ बड़े बुक सेलर के पास राजस्थान पाठ्य पुस्तक मण्डल की किताबें उपलब्ध हैं, लेकिन वे भी पूरी संख्या में नहीं हैं।

इस मामले पर जब राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डल के नागौर डिपो के अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने भी माना कि बाजार में जो किताबें बिक रही हैं, वे नकली और कॉपी प्रतीत होती हैं। अधिकारियों ने इस बारे में उच्च स्तर पर सूचना भेजने की बात कही है।

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह ने इस मामले पर कहा कि कक्षा सातवीं तक का पाठ्यक्रम अब एनसीईआरटी के तहत लागू किया गया है और राजस्थान में एनसीईआरटी और आरएसटीबी दोनों की किताबों से पढ़ाई कराई जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जो किताबें बाजार में दिखाई दे रही हैं, वे कॉपी लगती हैं, लेकिन उन पर केवल एनसीईआरटी का नाम होने के कारण सीधे कार्रवाई करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था और पुस्तक वितरण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि अगर जल्द ही इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।

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