जबलपुर। नर्मदा नदी के खिरैनी-जमतरा घाट पर जो तस्वीर सामने आई है, वह सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं बल्कि आस्था, पर्यावरण और प्रशासनिक जिम्मेदारी—तीनों पर सवाल खड़े करती है।
खबर के मुताबिक, कबाड़ी ठेकेदार द्वारा नदी के बीच तक मुरम, पत्थर और बोल्डर डालकर अस्थायी सड़क बना दी गई है। इसी रास्ते से जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहन नदी के भीतर चल रहे हैं, और वहीं पर लोहे के पुल को काटने का काम गैस वेल्डिंग से किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
जमतरा के रेलवे ब्रिज को पहले नदी में गिराया गया था
अब उसे निकालने के लिए बिना अनुमति बीच धारा में रास्ता बनाया गया
नदी की अविरल धारा को बाधित किया गया
भारी मशीनों से काम कर प्रदूषण फैलाया जा रहा है
आस्था बनाम वास्तविकता
जबलपुर में माँ नर्मदा को लेकर गहरी आस्था है, लेकिन इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आस्था सिर्फ आयोजनों और नारों तक सीमित रह गई है?
जहाँ श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए घाट पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर उसी स्थान पर नदी के भीतर मशीनों की आवाज और मलबे का अंबार नजर आ रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी जिला प्रशासन को है, इसके बावजूद:
अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं
अवैध गतिविधि पर रोक नहीं
नदी संरक्षण नियमों का पालन नहीं
पर्यावरणीय खतरे
इस तरह की गतिविधियों से:
नदी की प्राकृतिक धारा बाधित होती है
जलीय जीवों पर असर पड़ता है
जल प्रदूषण बढ़ता है
भविष्य में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ सकता है
यह मामला सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि नदी संरक्षण बनाम लापरवाही का उदाहरण बनता जा रहा है।
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका असर सिर्फ नर्मदा ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और आस्था पर पड़ेगा।


