मध्य प्रदेश, जिसे देश में सबसे अधिक तेंदुओं वाला राज्य माना जाता है, अब तेंदुओं की मौत के बढ़ते आंकड़ों को लेकर गंभीर चिंता के केंद्र में है। वन विभाग की सूचना के आधार पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच राज्य में 149 तेंदुओं की मौत दर्ज की गई। 2022 की राष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 3,907 तेंदुए थे, जो देश में सबसे अधिक है।
इन 149 मौतों में सबसे बड़ा कारण सड़क दुर्घटनाएं रहीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कुल मौतों में 31 प्रतिशत तेंदुए वाहन टक्कर का शिकार हुए, जबकि 19 मौतें सीधे हाईवे पर दर्ज की गईं। इसके अलावा 24 प्रतिशत मौतें उम्र, बीमारी जैसी प्राकृतिक वजहों से और 21 प्रतिशत मौतें आपसी संघर्ष से हुईं।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि जंगलों और वन्यजीव गलियारों से गुजरने वाले राजमार्ग तेंदुओं के लिए लगातार अधिक खतरनाक बनते जा रहे हैं। सिवनी-नागपुर मार्ग, रायसेन-भोपाल बेल्ट और सतपुड़ा परिक्षेत्र जैसे हिस्सों को विशेष रूप से जोखिमपूर्ण बताया गया है।
यह संकट केवल वन्यजीव संरक्षण का नहीं, बल्कि अवसंरचना नियोजन का भी सवाल है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य में वन्यजीव-संवेदनशील हाईवे खंडों पर सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर बढ़ा है। हाल में केंद्र ने मध्य प्रदेश के एक अहम वन्यजीव कॉरिडोर वाले एनएच-46 खंड पर 11 अंडरपास और ओवरपास वाले उन्नयन को मंजूरी दी, जबकि राज्य वन विभाग हाईवे और रेल लाइनों के साथ वन्यजीव सुरक्षा के लिए एसओपी पर भी काम कर रहा है।


