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*जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं, रोजगार सहायक व सरपंच पर गंभीर आरोप बालाघाट।* जिले की जनपद पंचायत किरनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सेवती में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2022 से अब तक हुए निर्माण कार्यों, स्ट्रीट लाइट योजना और रोजगार गारंटी के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को शिकायत सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
*मृतक के नाम पर निकाली गई राशि*
सबसे चौंकाने वाला मामला मृतक भोजराम मेश्राम के नाम पर फर्जी हाजिरी भरकर राशि आहरण करने का है। जानकारी के अनुसार भोजराम मेश्राम की मृत्यु 2 जून 2024 को हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद 9 से 15 मार्च 2025 तक उनके नाम से हाजिरी भरकर भुगतान निकाल लिया गया। यह सीधा-सीधा सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी और धोखाधड़ी का मामला है। हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामले में भी संबंधित रोजगार सहायक श्यामलाल पांचे पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई, बल्कि केवल 1000 रुपये का मामूली जुर्माना लगाकर मामला दबाने की कोशिश की गई।
*घटिया निर्माण और फर्जी स्ट्रीट लाइट घोटाला*
ग्राम सेवती में लुटिया भवराटोला में बन रही 600 मीटर सीसी रोड में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जहां मिट्टी युक्त रेत डाली जा रही है और सीमेंट की मात्रा भी कम रखी जा रही है, जिससे सड़क की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। वहीं, स्ट्रीट लाइट योजना के तहत 13,60,000 रुपये का स्टीमेट तैयार किया गया, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। इसके बावजूद मेंटेनेंस के नाम पर फर्जी बिल लगाकर 15वें वित्त की राशि निकाल ली गई। यह मामला पंचायत स्तर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
*जांच रिपोर्ट आई, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई*
इस पूरे मामले में गत 9 जनवरी 2026 को जनपद पंचायत किरनापुर द्वारा जांच दल गठित किया गया था, जिसमें 2,21,418 रुपये की वसूली भी की गई। जांच में यह भी सामने आया कि बिना तकनीकी स्वीकृति के 30,300 रुपये का मुलभूतिकरण कार्य और 1,04,500 रुपये नाली सफाई पर खर्च किए गए, जो नियमों के विरुद्ध है। इसके अलावा, ग्राम सभा की अनुमति के बिना ही खर्च किए जाने और शासन के दिशा-निर्देशो की अवहेलना भी उजागर हुई। बावजूद इसके, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
*आवेदक की मांग-दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई*
आवेदक पवन कश्यप (उपसरपंच, ग्राम पंचायत बिसोनी) ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन में मांग की है कि रोजगार सहायक श्यामलाल पांचे और संबंधित सरपंच के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी को अन्य पंचायत में स्थानांतरित कर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। आवेदन की प्रतिलिपि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को भी भेजी गई है, जिससे इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा?


