जबलपुर। आस्था और श्रद्धा के प्रमुख केंद्र ग्वारीघाट सहित नर्मदा के विभिन्न घाटों पर महिला श्रद्धालुओं को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विशेष रूप से वस्त्र परिवर्तन के लिए सुरक्षित और पर्याप्त चेंजिंग चैंबर्स की कमी महिलाओं के लिए असहज और कई बार असुरक्षित स्थिति उत्पन्न कर रही है।
घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद उपलब्ध चेंजिंग रूम या तो संख्या में बहुत कम हैं या उनकी हालत जर्जर हो चुकी है। कई स्थानों पर ये कक्ष गंदगी और अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिससे महिलाओं की निजता प्रभावित हो रही है। धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण इन स्थलों पर इस तरह की अव्यवस्था प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े करती है और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति उजागर करती है।
नगर निगम द्वारा वर्ष 2022 से 2025 के बीच ग्वारीघाट के लगभग 12 तटों पर नए चेंजिंग रूम बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसके साथ ही कबाड़ बसों को चेंजिंग रूम और रैन बसेरा के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसके अलावा घाट के पुनर्विकास में आधुनिक सुविधाओं से लैस चेंजिंग चैंबर्स शामिल करने की बात कही गई थी, लेकिन इन योजनाओं का अपेक्षित असर अब तक धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि घोषणाएं तो बार-बार हुईं, लेकिन सुविधाएं आज भी अधूरी हैं।
मई 2022 में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा घाटों का निरीक्षण कर प्रत्येक घाट पर कम से कम तीन अतिरिक्त चेंजिंग चैंबर्स बनाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि चार वर्ष बीत जाने के बाद भी इन निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं हो सका है, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है।
त्योहारों, अमावस्या, पूर्णिमा और विशेष धार्मिक अवसरों पर ग्वारीघाट में महिलाओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में चेंजिंग रूम की कमी और अधिक गंभीर रूप ले लेती है। कई महिलाएं अस्थायी व्यवस्थाओं का सहारा लेने को मजबूर होती हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और गरिमा दोनों प्रभावित होती हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि नर्मदा तट जैसे महत्वपूर्ण आस्था स्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और पर्याप्त चेंजिंग चैंबर्स की व्यवस्था अब प्राथमिक आवश्यकता बन चुकी है, जिस पर प्रशासन को शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।


