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Jabalpur
April 21, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

चाय की दुकान पर पीएचई का कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ाया, लोकायुक्त की कार्रवाई



जबलपुर। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने मंगलवार को छिंदवाड़ा जिले में छापा मारकर एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई चाय की दुकान पर की गई, जहां आरोपी ठेकेदार से पैसे ले रहा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परासिया निवासी ठेकेदार सौरभ मिश्रा ने पीएचई विभाग में निर्माण कार्य का ठेका लिया था। ठेके के तहत करीब 30 प्रतिशत कार्य पूरा होने के बाद उसके खाते में 4,11,665 रुपए की राशि आई। इसी भुगतान के बाद विभाग में पदस्थ कर्मचारी संदेश गजभिए ने ठेकेदार से 6 प्रतिशत कमीशन के रूप में लगभग 25 हजार रुपए रिश्वत की मांग की।

ठेकेदार ने इस अवैध मांग की शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक, जबलपुर से की। शिकायत का सत्यापन करने के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप तैयार किया। जांच के दौरान संदेश गजभिए ने अपने सहयोगी दर्पण मिश्रा से संपर्क करने को कहा।
बाद में दर्पण मिश्रा के साथ बातचीत में 14 हजार रुपए रिश्वत देने पर सहमति बनी। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने पूरी योजना के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया।

मंगलवार को तय योजना के अनुसार दर्पण मिश्रा, जो पंप अटेंडेंट के पद पर कार्यरत है, चाय की दुकान पर ठेकेदार से 14 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। जैसे ही उसने पैसे लिए, लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
इस कार्रवाई में संदेश गजभिए की भूमिका भी सामने आई है, जिसकी जांच जारी है और उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 12, 13(1)(क) एवं 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। लोकायुक्त टीम अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि अन्य संलिप्त लोगों की भी पहचान की जा सके।

इस कार्रवाई में लोकायुक्त की टीम के निरीक्षक शशिकला मस्कुले, निरीक्षक जितेंद्र यादव, उप निरीक्षक शिशिर पांडेय सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। टीम की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश दिया गया है।
विभाग में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद पीएचई विभाग में हड़कंप मच गया है। कर्मचारियों में डर का माहौल है और पूरे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी पहल माना जा रहा है, जिससे आम लोगों में यह संदेश गया है कि रिश्वतखोरी के मामलों में अब सख्ती से निपटा जाएगा।

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