जबलपुर। शहर में बारिश से पहले नाला-नाली सफाई के कार्य को लेकर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सफाई ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निगम अपने ही संसाधनों और कर्मचारियों का उपयोग कर रहा है, जिससे ठेकेदारों को बिना काम किए आर्थिक फायदा मिल रहा है।
जानकारों के अनुसार, नियमानुसार नाला सफाई का कार्य संबंधित ठेकेदार द्वारा किया जाना चाहिए, जिसमें वह अपने श्रमिकों के साथ-साथ मशीनरी जैसे मिनी हिटैची, जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध कराता है। इसके लिए ठेके में स्पष्ट शर्तें भी निर्धारित हैं कि प्रत्येक वार्ड में नियुक्त सफाई कर्मियों से ही यह कार्य कराया जाएगा। लेकिन इस बार स्थिति इसके उलट नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि कई वार्डों में नाला-नाली सफाई के लिए नगर निगम खुद अपनी मशीनें और कर्मचारी लगा रहा है, जबकि ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद वे निष्क्रिय बने हुए हैं। इस व्यवस्था से ठेकेदारों को बिना अतिरिक्त खर्च के भुगतान मिलने की बात सामने आ रही है।
सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी इस पूरे मामले में संलिप्त हैं और इस व्यवस्था के माध्यम से ठेकेदारों को लाभ पहुंचाकर बदले में निजी फायदा उठाया जा रहा है। आरोप यह भी है कि इस पूरे मामले की जानकारी नगर निगम आयुक्त तक नहीं पहुंचने दी गई।
नाला सफाई को लेकर एक और गंभीर पहलू सामने आया है। बताया जाता है कि ठेकेदार निर्धारित संख्या में श्रमिक तैनात नहीं कर रहे हैं और कम कर्मचारियों से काम चलाकर बाकी का भुगतान हड़प लिया जाता है। कई स्थानों पर केवल औपचारिक रूप से नालों की सफाई की जा रही है, जिसमें पूरी गाद निकालने के बजाय केवल ऊपरी कचरा हटाकर कार्य पूरा दिखा दिया जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि हल्की बारिश में ही नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं और जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
इसी बीच, ठेकेदारों पर लगने वाली पेनाल्टी को लेकर भी विवाद सामने आया। नगर निगम की हालिया बैठक में पेनाल्टी समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसका कुछ पार्षदों ने कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि यदि पेनाल्टी हटा दी गई तो ठेकेदारों की मनमानी और बढ़ जाएगी, जबकि वर्तमान में भी कई वार्डों में आधे कर्मचारी ही काम पर उपस्थित रहते हैं। विरोध के चलते यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
इस पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाले मानसून में जलभराव और गंदगी की समस्या गंभीर रूप ले सकती है।


