हैदराबाद, 26 अप्रैल तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने राज्यभर में ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन 2.0’ चलाया। इसका मकसद पहले गिरफ्तार हो चुके साइबर अपराधियों पर नजर रखना और यह सुनिश्चित करना है कि वे दोबारा अपराध या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल न हों।
तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने पुलिस के साथ मिलकर शनिवार को यह विशेष अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, 2024-25 के दौरान तेलंगाना में कुल 3,567 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से तेलंगाना के रहने वाले 614 आरोपियों को चुना गया। इन आरोपियों का नाम बड़े आर्थिक साइबर फ्रॉड मामलों और कई अन्य अपराधों से जुड़ा हुआ था, इसलिए इन्हें गहन जांच के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया।
तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो की निदेशक शिखा गोयल ने बताया कि 335 लोगों का सत्यापन किया गया। ये आरोपी तेलंगाना के 480 मामलों और देशभर के 1,233 मामलों से जुड़े हैं। इनमें से 218 लोगों का पता लगा लिया गया है। कुछ आरोपी अब भी उसी पते पर रह रहे हैं, जबकि कुछ दूसरी जगह चले गए हैं।
उन्होंने बताया कि 115 लोग अब तक नहीं मिले हैं और उनकी तलाश जारी है। वहीं, 3 आरोपियों की मौत हो चुकी है। सत्यापन के दौरान यह भी पता चला कि बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री मामले का आरोपी 30 वर्षीय प्रसाद कुमार इस समय नेपाल में रह रहा है।
इस राज्यव्यापी अभियान में तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो और कानून-व्यवस्था पुलिस की 300 टीमों ने एक साथ कई जगहों पर जांच की। इन टीमों ने आरोपियों के मौजूदा पते, कामकाज, वर्तमान स्थिति और गतिविधियों की जानकारी जुटाई।
तेलंगाना पुलिस की ओर से साइबर अपराध के मामलों में गिरफ्तारी के बाद निगरानी का यह पहला बड़ा अभियान है।
इस अभियान में आरोपियों की पहचान की गई और उनका विस्तृत डेटा तैयार किया गया, ताकि आगे विश्लेषण और निगरानी की जा सके। जिन मामलों में दोबारा अपराध में शामिल होने या संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले, उनमें कड़ी निगरानी शुरू कर दी गई है। इसके तहत पुलिस नियमों के अनुसार संदिग्ध सूची भी खोली गई है।
शिखा गोयल ने कहा कि यह पहली बार है, जब ऐसे आरोपियों की एक साथ जांच कर उनकी आपराधिक जानकारी संबंधित थानों के साथ साझा की गई है। इससे थानों के बीच तालमेल बेहतर होगा और निगरानी अधिक प्रभावी बनेगी।


