नई दिल्ली, 27 अप्रैल । प्रसव (डिलीवरी) के बाद महिला के शरीर में बहुत सारे बदलाव होते हैं। शरीर कमजोर होता है, हार्मोन बदलते हैं और इम्यून सिस्टम भी थोड़ा कमजोर हो जाता है। ऐसे में हल्का बुखार आना कभी-कभी सामान्य बात हो सकती है, लेकिन हर बुखार को हल्के में लेना भी सही नहीं है। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि कब बुखार सामान्य है और कब यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
डिलीवरी के बाद अगर महिला को हल्का बुखार हो, जैसे 100 डिग्री फारेनहाइट से कम और वह भी 1 से 2 दिन के अंदर ठीक हो जाए, तो अक्सर यह शरीर की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। कई बार शरीर डिलीवरी के बाद खुद को ठीक कर रहा होता है, उसी दौरान हल्की गर्मी या थकान के साथ बुखार जैसा महसूस हो सकता है। लेकिन, अगर बुखार लगातार बढ़ रहा हो या 3 दिन से ज्यादा बना रहे, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।
प्रसव के बाद बुखार का सबसे आम कारण है यूरिन इन्फेक्शन (यूटीआई)। इसमें पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना और कभी-कभी दर्द या कंपकंपी भी हो सकती है। दूसरा कारण है जननांग संक्रमण, जिसमें पेट के निचले हिस्से में दर्द, बदबूदार या असामान्य रंग का डिस्चार्ज और भारीपन महसूस हो सकता है।
कई महिलाओं में स्तन में सूजन या इंफेक्शन (मैस्टाइटिस) भी हो जाता है, खासकर जब बच्चा दूध सही तरीके से नहीं पी पाता है। इसमें स्तन लाल, सख्त और बहुत दर्दनाक हो जाता है और साथ में बुखार और शरीर दर्द भी हो सकता है।
अगर महिला की डिलीवरी ऑपरेशन (सीजेरियन) से हुई है, तो सर्जरी वाली जगह पर इंफेक्शन भी हो सकता है। इसमें टांकों के पास लालिमा, दर्द और सूजन हो सकती है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
इसके अलावा, कभी-कभी पैरों में सूजन और दर्द के साथ बुखार खून के थक्के का संकेत भी हो सकता है, जो बहुत गंभीर स्थिति होती है। साथ ही, सामान्य वायरल या सांस की इंफेक्शन भी बुखार का कारण बन सकते हैं।
अगर बुखार हल्का है, तो आराम करें, हल्का और तरल भोजन लें, शरीर को हाइड्रेट रखें और डॉक्टर की सलाह से इलाज करें। कुछ आयुर्वेदिक उपाय जैसे हल्का गर्म पानी, धनिया का काढ़ा या गिलोय का सेवन भी मदद कर सकता है, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह के साथ ही लेना चाहिए।


