May 2, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

सूरत : 54 वर्षों से गुजरात के विकास और समृद्धि में उकाई डैम का महत्वपूर्ण योगदान



सूरत, 28 अप्रैल दक्षिण गुजरात की लाइफलाइन उकाई डैम 54 वर्षों से प्रदेश के विकास और समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसने 3.31 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान कर हरा-भरा बना दिया है।



सूरत में तापी नदी पर बना उकाई डैम दक्षिण गुजरात की लाइफलाइन है। पांच दशक पहले 1972 में स्थापित यह डैम बीते 54 वर्षों से गुजरात के विकास और समृद्धि में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

इंजीनियरिंग कौशल के बेजोड़ उदाहरण उकाई डैम को ‘वल्लभ सागर’ के नाम से भी जाना जाता है। डैम की कुल लंबाई 4,900 मीटर है, जबकि ऊंचाई 345 फीट है, यानी करीब 30 मंजिल इमारत के बराबर है। डैम का कैचमेंट एरिया लगभग 62,225 वर्ग किलोमीटर है और इसकी वाटर स्टोरेज कैपेसिटी 7,414 मिलियन क्यूबिक मीटर है।

उकाई डैम से सूरत, तापी, नवसारी और वलसाड समेत दक्षिण गुजरात के कई जिलों की करीब 3.31 लाख हेक्टेयर जमीन पूरे साल सिंचित होती है। किसान इस डैम को किसी आशीर्वाद से कम नहीं मानते हैं।

किसान चंदूभाई गामित ने कहा कि हम खेती करते हैं। उकाई डैम हमारे लिए आशीर्वाद के समान है। जून महीने में भी हम उकाई डैम की वजह से खेती कर पा रहे हैं।

बीते दशकों में उकाई जलाशय दक्षिण गुजरात को रोशन करने वाला एक बहुत बड़ा ‘पावर बैंक’ भी साबित हुआ है। उकाई डैम पर कुल 305 मेगावाट कैपेसिटी की हाइड्रो पावर यूनिट संचालित हो रही है। बीते सात वर्षों में इनमें करीब 3,000 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की गई है, जिसकी कीमत लगभग 1,000 करोड़ रुपए है।

उकाई डैम के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एसवी जागीरदार ने कहा कि हमारा जो उकाई बांध है, उसकी बिजली उत्पादन क्षमता 305 मेगावाट है। पिछले सात वर्षों में 3,000 मिलियन से अधिक यूनिट बिजली उत्पादन हुआ है, जिसकी कीमत 1 हजार करोड़ रुपए है और इसका पानी दक्षिण गुजरात के पांच जिलों में पहुंचाया जाता है।

सूरत शहर को तापी नदी की बाढ़ से बचाने के लिए उकाई बांध के वाटर लेवल को रेगुलेट करने के लिए खास ‘रूल लेवल’ तय किए गए हैं। इसके मुताबिक, 1 जुलाई को पानी का लेवल 321 फीट, 1 अगस्त को 333 फीट, 1 सितंबर को 335 फीट, 15 सितंबर को 340 फीट और 1 अक्टूबर को 345 फीट रहता है।

नौ वर्षों तक पूरे दक्षिण गुजरात को पीने के पानी की आपूर्ति करने की क्षमता वाला यह बांध आज न केवल लाखों हेक्टेयर जमीन और करोड़ों लोगों की प्यास बुझा रहा है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में इंडस्ट्रियल और इकोनॉमिक डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर गुजरात की समृद्धि और खुशहाली में भी उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।

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