L बालाघाट/जैन धरोहर दिवस स्वर्गीय श्री निर्मल जी सेठी द्वारा विगत 40 वर्षों में देश विदेश में जैन धरोहरों एवं प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार,पुरातत्व संग्रहालय निर्माण जैसे अनेको कार्य किये है उनकी पांचवी पुण्यतिथि के अवसर पर जैन धरोहर दिवस मनाया जाता है। प्रथम चरण कार्यक्रम में सुबह 9.30 बजे मंदिर जी में जैन धरोहर दिवस के उपलक्ष्य में जानकारी दी गईं।
द्वितीय चरण श्री दिगम्बर जैन पंचायत तथा इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट के संयुक्त तत्वावधान में शाम 5.30 बजे 7.30 बजे तक पुरातत्व संग्रहालय परिसर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में उपस्थिति सभी समाजजनों के साथ संग्रहालय का अवलोकन किया, जिसमें जैन तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान एवं महावीर भगवान की अति प्राचीन खंडित प्रतिमाओं को देखकर सभी का मन हर्षित हुआ। उक्त दोनों प्रतिमाये लगभग छठवीं सातवीं ई की बताई गईं जिन्हें उसे समय की आताताइयों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया था दोनों तीर्थंकर की प्रतिमाएं आज से 40-50 वर्ष पूर्व स्थानीय काली पुतली चौक के आसपास खुदाई के समय भूगर्भ से प्राप्त हुई थी, जो कई वर्षों तक यत्र तत्र पड़ी हुई थी।
पुरातत्व संग्रहालय के संग्रहाध्यक्ष डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार के अथक प्रयासों से पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना स्थानीय पंच कोणी मार्ग [तिराहे] पर की गई, जहाँ दोनों जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाओं को जैन धरोहर के रूप में संजोकर रखा गया है।
समाज की अनोखी कलाकार श्रीमती ज्योति दीपक जैन द्वारा आदिमानव के विकास, अग्निवेश, अप्सरा पर बनाई गईं पेंटिंग भी देखी व सराहना की गईं।
डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार के इन्हीं प्रयासों के लिए श्री दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र जैन उपाध्यक्ष श्री दीपक जैन पूर्व कमेटी उपाध्यक्ष श्री राजकुमार जैन एवं तीर्थ संरक्षणी महासभा की स्थानीय समन्वयक श्रीमती माधुरी जैन द्वारा पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन महिला मंडल की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती अंगूरी जैन श्रीमती सुनीता जैन महिला मंडल उपाध्यक्ष श्रीमती संध्या जैन श्री विद्यासमय शाखा की अध्यक्ष श्रीमती रजनी जैन कोषाध्यक्ष श्रीमती आभा जैन वरिष्ठ सदस्य श्रीमती सुषमा जैन एवं उच्च श्रविका माँ उपस्थित रही, साथ ही पुरातत्व संग्रहालय की ओर से दिनेश नेमा, सतीश भारद्वाज एवं बलिंदर चौहान जी ने सहयोग प्रदान किया।
श्रीमती माधुरी जैन द्वारा जैन धर्म और जैन तीर्थं क्षेत्रों एवं धरोहरों की रक्षा के लिए इस आयोजन में सम्मिलित सभी सदस्यों का आभार प्रकट किया गया।


