नईदिल्ली,28 अपै्रल । ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर चौथी रूसी एस-400 वायु रक्षा प्रणाली भारत के लिए रवाना हो चुकी है। इसके मई के मध्य तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। इसी तरह 5वीं एस-400 के इसी साल नवंबर में भारत भेजे जाने की संभावना है। केंद्र सरकार ने पहले ही 5 और एस-400 प्रणालियों की खरीद को हरी झंडी दे दी है, जिनमें किसी भी हवाई लक्ष्य को 400 किलोमीटर की लक्ष्य सीमा तक नष्ट करने की क्षमता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने चौथी एस-400 वायु रक्षा प्रणाली का भारत रवाना किए जाने से पहले ही 18 अप्रैल को निरीक्षण कर लिया था। यह एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली पिछले सप्ताह रूस से भेजी गई थी। उम्मीद है कि इस नई प्रणाली को राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात किया जाएगा ताकि पाकिस्तान के खिलाफ उसकी मिसाइल रक्षा को मजबूत किया जा सके।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलों की भरपाई के लिए और स्टैंड-ऑफ हथियारों का भंडार बनाने के लिए पहले ही 280 लघु और दीर्घ श्रेणी की एस-400 मिसाइलें खरीदने का फैसला कर लिया है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है। अनुमान है कि भारत ने पाकिस्तान पर 11 दीर्घ श्रेणी की एस-400 मिसाइलें दागीं, जिनमें दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हवाई चेतावनी प्रणालियों और परिवहन विमानों को मार गिराया था।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने पंजाब और गुजरात में तैनात एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाने की पुरजोर कोशिश की, क्योंकि उन्हें यह स्पष्ट हो गया था कि सिंधु नदी के पूर्व में कोई भी हवाई अड्डा रूसी प्रणाली और उसके लंबी दूरी के रडार से सुरक्षित नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान ने भारतीय मिसाइलों से बचने के लिए अपने सभी कार्यरत लड़ाकू विमानों को क्वेटा और पेशावर के ठिकानों पर स्थानांतरित कर दिया था।
उम्मीद की जा रही है कि 5वीं एस-400 वायु रक्षा प्रणाली चीन के साथ मध्य-क्षेत्र में तैनात की जाएगी। भारत निजी क्षेत्र द्वारा एस-400 के लिए रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल सुविधा स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है। इसके साथ ही प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। एस-400 प्रणालियों की सुरक्षा और उसे ड्रोन-रोधी बनाने के लिए सरकार रूस से 12 पैंटसिर वायु रक्षा प्रणालियां खरीदने की योजना बना रही है।
एस-400 की गिनती दुनिया की श्रेष्ठ वायु रक्षा प्रणालियों में होती है। ये 40 से 400 किलोमीटर तक हर लक्ष्य को मार गिराने में सक्षम है। इसमें लंबी दूरी का रडार सिस्टम और हर मौसम में चलने वाले ट्रांसपोर्ट व्हीकल भी होते हैं, जिससे इसे कहीं भी तैनात किया जा सकता है। एस-400 के हर स्क्वाड्रन में 2 मिसाइल बैटरियां होती हैं, जिनमें 128 मिसाइलें होती हैं। भारत ने इन्हें उत्तर-पश्चिम और पूर्वी इलाके में तैनात किया हुआ है।
फ्रांस और इजरायल से भारत रक्षा आपूर्ति बढ़ा रहा है, लेकिन रूस अब भी भारत का बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2020 और 2024 के बीच, भारत के हथियार आयात में रूस का हिस्सा 36 प्रतिशत रहा। बता दें कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ सफलतापूर्वक जवाबी कार्रवाई में एस-400 वायु रक्षा प्रणाली को कई मिसाइलों को रोकने और नष्ट करने का श्रेय दिया जाता है।


