जबलपुर। नगर निगम में ठेका सफाई कर्मियों और आउटसोर्स कर्मचारियों के कथित शोषण का मुद्दा मंगलवार को उस समय गरमा गया, जब पूर्व विधायक विनय सक्सेना अपने समर्थकों के साथ निगम मुख्यालय पहुंचे और जनसुनवाई कक्ष में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ कहा कि जब तक कर्मचारियों को न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
सात बिंदुओं में खोली व्यवस्था की पोल
विनय सक्सेना ने निगमायुक्त के नाम सौंपे गए ज्ञापन में सात प्रमुख बिंदुओं के जरिए आरोप लगाए कि नगर निगम में ठेके पर काम कर रहे सफाई और आउटसोर्स कर्मचारियों का व्यापक स्तर पर शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ठेकेदारों द्वारा कर्मचारियों को न तो तय मानकों के अनुसार वेतन दिया जा रहा है और न ही जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान का आरोप
ज्ञापन में बताया गया कि जहां श्रम कानून और कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार मजदूरी तय है, वहीं कर्मचारियों को मात्र 250 रुपये प्रतिदिन दिए जा रहे हैं।
इसके अलावा पीएफ और ईएसआईसी जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी कर्मचारियों को वंचित रखा जा रहा है, जो गंभीर अनियमितता है।
संसाधनों की भारी कमी
सफाई कर्मचारियों को काम के लिए जरूरी उपकरण—जैसे झाड़ू, फावड़ा, तसला, दस्ताने, मास्क, जैकेट और जूते—भी पर्याप्त मात्रा में नहीं दिए जा रहे। इससे न केवल काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
भुगतान में गड़बड़ी का मामला
गढ़ा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया गया कि एक युवक, जो ठेकेदार के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराता है, पिछले डेढ़ साल से मजदूरी भुगतान के लिए निगम के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे अब तक भुगतान नहीं मिला।
साथ ही यह भी आरोप है कि नगर निगम ठेकेदार को 30 दिन का भुगतान करता है, जबकि कर्मचारियों को केवल 26 दिन का ही वेतन दिया जाता है।
तीन दिन में जांच का आश्वासन
विनय सक्सेना के अनुसार, उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को निगम प्रशासन ने प्रारंभिक रूप से सही माना है और तीन दिन के भीतर जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
चेतावनी: आंदोलन होगा और तेज
धरने के दौरान सक्सेना ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के साथ हो रहे शोषण को जल्द नहीं रोका गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो मामला भोपाल और दिल्ली तक उठाया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी
इस दौरान कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने कर्मचारियों के समर्थन में आवाज बुलंद की और निगम प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की।


