बालाघाट शहर के शासकीय देवी तालाब को अतिक्रमण और प्रदुषण से मुक्त करने के लिए कई वर्षों से चल रहे संघर्ष को एक नया आयाम मिला है जहाँ एनजीटी भोपाल ने बालाघाट नगर के नागरिक द्वारका नाथ चौधरी और प्रदीप परांजपे की ओर से देवी तालाब की बदहाली को लेकर एनजीटी भोपाल में प्रस्तुत याचिका में दिनांक 27/04/2026 को अंतिम सुनवाई करते हुए कलेक्टर बालाघाट मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगरपालिका परिषद बालाघाट एवं संभागीय वन अधिकारी बालाघाट को देवी तालाब से अतिक्रमण हटाकर संरक्षित करने के लिए कठोर आदेश पारित किये है
क्या है अंतिम आदेश
(1) प्रतिवादियों / संबंधित ज़िला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया जाता है कि वे वेटलैंड नियम, 2017 की धारा 4 का कड़ाई से पालन करें और उसे लागू करें तथा यह सुनिश्चित करें कि प्रतिबंध क्षेत्रों के संबंध में उचित सीमांकन, बाड़बंदी, संकेत-पट्ट और चेतावनी-पट्ट उपयुक्त स्थानों पर लगाए जाएँ।
(2) नगरपालिका परिषद, बालाघाट को निर्देश दिया जाता है कि वह देवी तालाब की सफाई, ठोस और प्लास्टिक कचरा डालने से रोकने तथा खरपतवारों को वैज्ञानिक तरीके से हटाने के लिए एक समय-सीमाबद्ध योजना के तहत तत्काल कार्रवाई करे।
(3) नगरपालिका परिषद / संभागीय वन अधिकारी, बालाघाट को यह निर्देश दिया जाता है कि तालाब की परिधि के चारों ओर स्थानीय प्रजाति के पौधों का सघन रोपण किया जाए ताकि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के कारण अथवा तेज़ हवाओं के चलते गिरने वाले पौधों/वृक्षों की क्षतिपूर्ति की जा सके। नगर परिषद, बालाघाट, इस स्थल के जीर्णोद्धार के लिए एक विस्तृत और समय-सीमा वाला कार्य-योजना तैयार करेगी, जिसकी जाँच और अनुमोदन ‘जिला आर्द्रभूमि संरक्षण समिति, बालाघाट’ द्वारा किया जाएगा; इस समिति की अध्यक्षता संबंधित जिला मजिस्ट्रेट करेंगे। इसके अतिरिक्त, स्थानीय निकाय शहर में AMRUT 2.0 और SBM योजनाओं के तहत प्रस्तावित सीवरेज नेटवर्क कनेक्शनों की स्थापना तथा STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण एवं संचालन में तेज़ी लाने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे, इसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करेंगे, और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी जल-निकाय में अनुपचारित (untreated) जल का निकास न हो।
(4) राज्य प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड को यह निर्देश दिया जाता है कि वह समय-समय पर यह निगरानी करे कि किसी भी जल-स्रोत में कोई भी अनुपचारित जल न छोड़ा जाए और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में नियमों के अनुसार आवश्यक कड़ी कार्रवाई की जाए।
(5) इस मामले से संबंधित किसी भी विवादित या मुकदमे के अधीन संपत्ति के अधिकार, हक और हित या स्वामित्व का निर्धारण, जो सिविल न्यायालय या उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है, संबंधित न्यायालय के आदेशों द्वारा शासित होगा।
क्या है वेटलैंड एक्ट 2017 की धारा 4
वेटलैंड एक्ट 2017 की 4 के अनुसार किसी भी वेटलैंड अर्थात तालाब झील को भरने की मंशा से उसमे डाला गया मिट्टी-मुरुम या ठोस अपशिष्ट का भरन अतिक्रमण की श्रेणी में आता है एवं किसी भी किस्म के अतिक्रमण सहित गैर आद्रभूमि उपयोग हेतु परिवर्तन को प्रतिषीद्ध किया जाएगा l
अतिक्रमणकारियों ने बताया निजी भूमि
एनजीटी में अतिक्रमणकारियों के अधिवक्ता ने बताया कि उच्च न्यायालय जबलपुर की जनहित याचिका क्रमांक 4434/2003 के आदेश के अनुसार देवी तालाब की भूमि निजी भूमि है और वह इस तालाब की भूमि के मालिक है और इस सम्बन्ध में उच्च न्यायालय जबलपुर एवं सिविल न्यायालय बालाघाट में याचिका विचाराधीन है इसलिए इस याचिका को ख़ारिज किया जावें किन्तु याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता धरमवीर शर्मा ने एनजीटी को बताया कि जनहित याचिका क्रमांक 4434/2003 एवं उसकी पुनर्विचार याचिका क्रमांक 2109/2008 में किसी को भूमि का मालिकाना हक नहीं दिया गया है जबकि शासकीय देवी तालाब की भूमि के कुल रकबे 16.14 एकड़ में से मात्र 3 डिसमिल भूमि निजी भूमि है शेष 16.11 एकड़ शासकीय भूमि है जो उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेशों की तत्कालीन तहसीलदार बालाघाट के द्वारा की गई त्रुटिपूर्ण विवेचना के कारण निजी हक में दर्ज हुई है जिसे सुधारने के लिए उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका दायर की गई है किन्तु एनजीटी के समक्ष यह याचिका देवी तालाब के पर्यावरणीय कारणों से दायर की गई है l
संघर्ष को मिली सफलता
बालाघाट नगर के शासकीय देवी तालाब को अतिक्रमण मुक्त कर उसे उसके मूल स्वरूप में स्थापित किये जाने के लिए लगभग 3 दशकों से संघर्ष चल रहा है और इस संघर्ष में बालाघाट नगर के कुशल व्यवसायी स्व सुरेश कोचर का अमूल्य योगदान रहा है वही उनके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चलने वाले अधिवक्ता कलीम कुरैशी, पीएल पुछिया, राम मोटवानी, प्रदीप परांजपे, राजेश मरार, द्वारका नाथ चौधरी, जीतू बर्वे, वसंत पटेल, मिलिंद ठाकरे, नितिन हिरकने, निस्वार्थ कोचर, नितिन मिश्रा समेत नगर के अन्य गणमान्य नागरिकों का भी योगदान रहा है l
पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्यवाही
उक्त याचिका में याचिकाकर्ता द्वारा नाथ चौधरी ने बताया कि एनजीटी भोपाल के द्वारा पूर्व में भी दिनांक 23/09/2025 एवं दिनांक 10/11/2025 को आदेश जारी किये गए थे किन्तु कलेक्टर बालाघाट एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगरपालिका परिषद बालाघाट के द्वारा उन आदेशों का पालन नहीं किया गया किन्तु अब दिनांक 27/04/2026 को एनजीटी भोपाल के द्वारा अंतिम आदेश पारित कर कलेक्टर बालाघाट एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगरपालिका परिषद बालाघाट को आदेशित किया गया है कि देवी तालाब से अतिक्रमण हटायें एवं प्रदुषण को समाप्त करे यदि इनके द्वारा आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो इनके विरुद्ध माननीय न्यायाधिकरण के आदेशों की अवमानना का प्रकरण पंजीबद्ध किया जावेगा
अतिक्रमणकारियों पर क़ानूनी कार्यवाही
याचिकाकर्ता द्वारा नाथ चौधरी ने बताया कि वह मेट्रोपॉलिटन या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट बालाघाट के समक्ष एनजीटी एक्ट 2010 की धारा 30 के तहत वाद दायर करेंगे क्योंकि एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिन पक्षों पर जल-निकाय की ज़मीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण करने का आरोप है उन्हें मामले में पक्षकार न बनाए जाने के कारण हमें संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए बिना कोई प्रभावी आदेश पारित करने का कोई कारण नज़र नहीं आता इसके अलावा याचिकाकर्ता धारा 30 के तहत किसी मेट्रोपॉलिटन या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन दायर कर सकता है और संबंधित मजिस्ट्रेट इस अपराध का विचारण करने तथा विधि के अनुसार आगे की कार्यवाही करने के लिए सक्षम है


