कोतमा -ओवरलोडिंग का ‘आधिकारिक षड्यंत्र’- 13 क्यूबिक मीटर वाले डंपरों को 29 का ‘वरदान’, सड़कों का निकला दम, अरबों की रॉयल्टी स्वाहा जांच के नाम पर चल रहा ‘ढोंग’- जिस पर उठे सवाल उसी को सौंपी जांच की कमान, जवाब देने से बच रही खनिज निरीक्षक अनूपपुर जिले की जीवनदायिनी नदियां प्रशासन और एसोसिएट कॉमर्स के नापाक गठजोड़ की बलि चढ़ रही हैं। पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाकर सरेआम की जा रही इस डिजिटल डकैती ने पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर दिया है और सरकारी खजाने में अरबों की सेंध लगाई है। वातानुकूलित कमरों में बैठे जिम्मेदार अफसरों ने अपनी आंखों पर गांधी जी के तीन बंदरों वाला चश्मा पहन लिया है। स्थानीय प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी और साक्ष्यों की अनदेखी के बाद अब यह मामला सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहुँच गया है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और प्रशासन गिरवी रखा हो, तो न्याय की गुहार दिल्ली की दहलीज तक ले जाना मजबूरी है। अनूपपुर:- जिले के मानपुर, दैखल और चंगेरी क्षेत्रों में रेत उत्खनन के नाम पर चल रहा यह खेल किसी बड़े घोटाले से कम नहीं है। एसोसिएट कॉमर्स के इशारों पर भारी पोकलेन मशीनों के प्रहार से नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है और स्वीकृत सीमा से मीलों दूर अवैध खनन जारी है। कलेक्टर और माइनिंग कॉर्पोरेशन को साक्ष्यों सहित शिकायत किए 15 दिन बीत गए, लेकिन कार्रवाई शून्य है। यह खामोशी गवाही दे रही है कि आला अफसरों की कुर्सियों को भ्रष्टाचार की दीमक चाट चुकी है और वे माफिया के सामने नतमस्तक हैं। अब यह लड़ाई वल्लभ भवन से निकलकर सीधे दिल्ली और माननीय उच्च न्यायालय पहुँचने को तैयार है। तर्क और विज्ञान फेल, अनुमति से पहले ही परिवहन शुरू
अनूपपुर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली जादूई है जहाँ कागजों पर वजूद में आने से पहले ही व्यापार शुरू हो गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने जिस यूनिट को 27 जून 2024 को अनुमति दी खनिज विभाग ने 7 जून को ही उसकी ई-टीपी जारी कर दी। यह पोर्टल की सुरक्षा में सेंधमारी और तकनीकी हेराफेरी कर राजस्व चोरी का खुला खेल है। हास्यास्पद यह है कि जिसकी कार्यप्रणाली पर सवाल हैं, जांच भी उसी खनिज निरीक्षक के जिम्मे है। यह अंधेरगर्दी साबित करती है कि खनिज के जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ एसोसिएट कॉमर्स’ के मुनीम बनकर रह गए हैं।पोकलेन का निर्मम प्रहार और सिसकती नदियों का अस्तित्व नदियों की प्राकृतिक धारा मोड़कर मशीनों से किए जा रहे गहरे उत्खनन ने जलस्तर और जलीय जीवन को अपूर्णीय क्षति पहुँचाई है। स्वीकृत खदानों की सीमा से 1 से 3 किलोमीटर बाहर तक एसोसिएट कॉमर्स का साम्राज्य फैल चुका है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यहाँ दिन-रात पोकलेन नदियां नोच रही हैं। प्रशासन की मौन सहमति बताती है कि यहाँ कानून का राज नहीं, बल्कि रसूखदारों का डिजिटल और फिजिकल सिंडिकेट काम कर रहा है और हुक्मरान अपनी रीढ़ की हड्डी पूरी तरह गिरवी रख चुके हैं।
ओवरलोडिंग को आधिकारिक आशीर्वाद और राजस्व की लूट
सड़कें भारी वाहनों के बोझ से दम तोड़ रही हैं, लेकिन पोर्टल पर फर्जीवाड़ा बदस्तूर जारी है। जिस डंपर की क्षमता मात्र 13.49 क्यूबिक मीटर है, उसे विभागीय पोर्टल से 29 क्यूबिक मीटर तक के पास जारी हो रहे हैं। यह ओवरलोडिंग को आधिकारिक रूप से वैध बनाने का षड्यंत्र है, जिससे करोड़ों की रॉयल्टी का चूना लग रहा है। शिकायतकर्ता ने फर्जी पास की कॉपियां भी सौंपी हैं, लेकिन मलाईदार कुर्सियों पर बैठे अफसरों ने आंखें मूंद रखी हैं। मानो इस राजस्व लूट का बड़ा हिस्सा सीधे ‘साहबों’ के बंगलों तक पहुँच रहा हो। दिल्ली में दस्तक और उच्च न्यायालय जाने की तैयारी
जिले से लेकर प्रदेश तक के अफसरों की ‘सोची-समझी खामोशी’ ने अब इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचा दिया है। पीएमओ में शिकायत दर्ज होने और विशेष एजेंसीयों ने शिकायत दर्ज कर लिया है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च न्यायालय की शरण लेंगे। देखना है कि स्मरण पत्र मिलने के बाद भी कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन जागता है या ‘एसोसिएट कॉमर्स’ को बचाने के लिए फाइलों को दबाने का खेल जारी रहता है।


