परसवाड़ा।
लामता-बैहर मार्ग पर स्थित गॉडर पुल एक बार फिर चर्चा में है। ब्रिटिश कालीन इस ऐतिहासिक पुल को हाल ही में प्रशासन की पहल से नई जिंदगी मिली है। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी धन्नाराम उइके के निर्देश पर पुल के आसपास उगी झाड़ियों की सफाई कराई गई और लंबे समय से बंद पड़े इस पुल पर सीमित आवाजाही दोबारा शुरू कर दी गई है।
दो साल बाद मिली राहत करीब दो वर्षों से बंद पड़े इस पुल को अब पैदल यात्रियों, साइकिल और बाइक सवारों के लिए खोल दिया गया है। हालांकि सुरक्षा को देखते हुए भारी वाहनों के आवागमन पर रोक जारी है। इससे स्थानीय ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
ब्रिटिश दौर की इंजीनियरिंग का नमूना यह पुल 19वीं
सदी के अंतिम दौर में निर्मित माना जाता है और लंदन से मंगाए गए लोहे से तैयार किया गया था। आज भी इसके ढांचे पर इंग्लैंड की कंपनियों के निशान देखे जा सकते हैं, जो इसकी ऐतिहासिकता को दर्शाते हैं।
स्थानीय स्मृतियों में बसा इतिहास ग्रामीणों के
अनुसार यह पुल उनके पूर्वजों के समय से मौजूद है। बुजुर्गों की मानें तो 1926 के आसपास इसका निर्माण पूरा हुआ था।
संरक्षण की जरूरत अभी बाकी हालांकि : सफाई और सीमित
उपयोग की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे स्थायी रूप से संरक्षित करने के लिए धरोहर घोषित करना जरूरी है। अधिकारी ने साइन बोर्ड और रंग-रोगन की भी योजना जताई है।
उपेक्षा और चोरी से नुकसान | देखरेख के अभाव में पुल के
कई लोहे के हिस्से चोरी हो चुके हैं और नीचे लगे जाल भी गायब हो गए हैं। आसपास गंदगी की समस्या भी बनी हुई है, जिससे इसकी हालत प्रभावित हुई है।


