May 2, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

हाजियों का आख़िरी जत्था रवाना, अकीदत और दुआओं के बीच भावुक विदाई


जबलपुर। हज कमेटी मध्य प्रदेश द्वारा निर्धारित कोटे के तहत हज यात्रा पर जाने वाले हाजियों का आख़िरी जत्था गुरुवार को रवाना हो गया। इस अवसर पर शहर में गहरी आस्था, उल्लास और रुख्सती की भावनाओं से भरा माहौल देखने को मिला। परिजन अपने प्रियजनों को विदा करते समय जहां भावुक नजर आए, वहीं उनके लिए दुआओं का सिलसिला भी लगातार चलता रहा।
पिछले साल की यादें, इस साल की नई शुरुआत
जानकारी के अनुसार, बीते वर्ष हाजी इसरार अहमद (बादल कबाब) का मक्का शरीफ़ में हज के दौरान इंतकाल हो गया था। इस वर्ष उनके पुत्र अतीक़ अहमद ने अपने पिता की इस अधूरी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और वे अपनी पत्नी के साथ हज यात्रा के लिए रवाना हुए। यह पल परिवार और परिचितों के लिए बेहद भावुक रहा, क्योंकि इसमें एक ओर पिता की यादें थीं तो दूसरी ओर धार्मिक कर्तव्य की पूर्ति का संकल्प।
यात्रा का क्रम
हाजी पहले गरीबरथ एक्सप्रेस के माध्यम से मुंबई पहुंचेंगे। वहां से वे हवाई यात्रा द्वारा मक्का-मदीना शरीफ़ पहुंचकर हज के सभी अरकान अदा करेंगे। हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है, जिसे हर सक्षम मुस्लिम के लिए जीवन में कम से कम एक बार करना आवश्यक माना गया है।
स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब
जबलपुर रेलवे स्टेशन पर हाजियों को विदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। परिजन, रिश्तेदार, मित्र और समाज के लोग फूल-मालाएं, इत्र और पगड़ी के साथ हाजियों का सम्मान करते नजर आए। विदाई के दौरान “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक” की सदाएं गूंजती रहीं, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया।
दुआओं और शुभकामनाओं का सिलसिला
इस मौके पर अबरार अहमद, मसरूर अहमद रज़वी, मोहम्मद शोएब, मोहम्मद अज़ीम, मोहम्मद इमरान सहित अनेक लोगों ने हाजियों को गले लगाकर विदा किया और उनकी सलामती, कामयाबी तथा हज की कुबूलियत के लिए दुआएं कीं। कई लोगों ने हाजियों से अपने लिए भी दुआ करने की गुजारिश की।
प्रशासनिक व्यवस्थाएं
हज यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे स्टेशन पर आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई थीं। सुरक्षा, मार्गदर्शन और सहायता के लिए संबंधित विभागों के कर्मचारी तैनात रहे, जिससे हाजियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इस तरह, आस्था, परंपरा और भावनाओं से भरे इस पल ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि हज यात्रा सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव भी है, जो पूरे समाज को एकजुट कर देता है।

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