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जबलपुर। जिले में संचालित कॉलेजों की मान्यता, संबद्धता और निरीक्षण प्रक्रिया को लेकर स्थिति लगातार उलझती नजर आ रही है। जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक स्पष्ट जानकारी सामने न आने के कारण छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।
सबसे पहले सवाल रिन्युवल फीस को लेकर उठ रहा है। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संबंधित कॉलेजों ने समय पर नवीनीकरण शुल्क जमा किया है या नहीं। यदि फीस जमा नहीं हुई, तो क्या उनकी संबद्धता स्वतः समाप्त मानी जाएगी, या फिर उन्हें किसी प्रकार की छूट दी गई है—इस पर भी कोई आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है।
दूसरा बड़ा प्रश्न संबद्धता (अफिलिएशन) को लेकर है। कई कॉलेजों की मान्यता जारी है या निरस्त हो चुकी है, इसकी पुष्टि तक नहीं हो पाई है। ऐसे में छात्र यह समझ नहीं पा रहे कि वे जिन संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी डिग्री भविष्य में मान्य होगी या नहीं।
इसी क्रम में निरीक्षण प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि कॉलेजों के मूल्यांकन के लिए किसी कमेटी का गठन हुआ भी है या नहीं। यदि कमेटी बनी है, तो उसमें शामिल सदस्यों की जानकारी, उनकी योग्यता और निरीक्षण के मापदंड क्या हैं—यह भी सार्वजनिक नहीं किया गया।
और यदि निरीक्षण किया गया है, तो अब तक कितने कॉलेजों का निरीक्षण हुआ, किन आधारों पर रिपोर्ट तैयार की गई और किन संस्थानों को मान्यता दी गई या रोकी गई—इन सभी बिंदुओं पर पूरी तरह से चुप्पी बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार जिले में कुल 165 कॉलेज संचालित हैं, जिनमें से 76 कॉलेज इसी जिले के अंतर्गत आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में संस्थानों के संचालन के बावजूद यदि नियामकीय प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी नहीं है, तो यह शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में छात्रों के भविष्य को लेकर कोई ठोस आश्वासन सामने नहीं आया है। बिना स्पष्ट नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के यदि निर्णय लिए जा रहे हैं, तो हजारों छात्र-छात्राओं की मेहनत और उनका करियर जोखिम में पड़ सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अनिश्चितता से न केवल छात्रों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता भी कमजोर पड़ती है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग तत्काल स्थिति स्पष्ट करे, सभी प्रक्रियाओं को सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी छात्र के भविष्य के साथ अन्याय न हो।


