May 15, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

बलूचिस्तान में मानवाधिकार का उल्लंघन, नागरिक की हत्या और छात्र के अपहरण का आरोप



क्वेटा, 14 मई  बलूचिस्तान भर में नागरिकों के खिलाफ हिंसा लगातार जारी है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने गुरुवार को एक नागरिक की कथित गैर-न्यायिक हत्या और दूसरे व्यक्ति के जबरन गायब किए जाने की जानकारी दी है, जिसके लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार बताया गया।


बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने बताया कि जान मोहम्मद का गोलियों से छलनी शव बुधवार को केच जिले के बानोक-ए-चदाई इलाके में पड़ा मिला। जान मोहम्मद को करीब चार महीने पहले जबरन गायब कर दिया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, जैन मोहम्मद को 24 जनवरी को केच के टुम्प इलाके में उसके घर से उठाया गया था और उसे कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थित ‘डेथ स्क्वॉड’ ने अगवा किया था।

इसी दिन एक अलग घटना में पांक ने बताया कि 18 साल के एक छात्र शहाब बलूच को वाशुक जिले में उसके घर से पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स ने जबरन उठा लिया।

बुधवार को मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच यकजेहती कमेटी की प्रमुख आयोजक महरंग बलूच ने हाल के दिनों में बढ़ती जबरन गुमशुदगियों, गैर-न्यायिक हत्याओं और बलूचिस्तान में फर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर गंभीर चिंता जताई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्ट किए गए अपने बयान में महरंग ने कहा, “शांतिपूर्ण राजनीतिक अभिव्यक्ति और मानवाधिकारों की आवाज उठाने की जगह दिन-ब-दिन कम होती जा रही है, जबकि न्याय की मांग करने वालों को डर और धमकी देकर लगातार चुप कराया जा रहा है।”

बलूच कार्यकर्ता ने कहा कि बलूच यकजेहती कमेटी के सदस्यों के परिवारों को परेशान करने, शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को गायब करने और खुलेआम लोगों की हत्या करने जैसी नई रणनीतियां दिखाती हैं कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति कितनी खराब हो चुकी है।

उन्होंने कहा, “शांतिपूर्ण आंदोलन को अपराध बनाया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार लोग बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहे हैं। राज्य खुद ऐसी कहानियां बना रहा है, ताकि विरोध की आवाज को दबाया जा सके।”

उन्होंने कहा, “हम साफ करना चाहते हैं कि बलूच यकजेहती कमेटी हमेशा शांतिपूर्ण थी, है और आगे भी रहेगी। हम बलूचिस्तान में अत्याचार, जबरन गायब किए जाने और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।”

महरंग ने सभी मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की कि वे बलूचिस्तान की स्थिति पर गंभीर ध्यान दें और पाकिस्तान को वहां शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने और चल रहे मानवाधिकार संकट के लिए जवाबदेह ठहराएं।

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