जबलपुर। जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड एक बार फिर कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) अंशदान को लेकर विवादों में घिर गई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने खुलासा किया है कि अक्टूबर 2017 से नवंबर 2025 तक की अवधि का ₹23.40 लाख से अधिक का पीएफ बकाया अब तक जमा नहीं किया गया है। मामले को गंभीर मानते हुए ईपीएफओ ने स्मार्ट सिटी प्रबंधन को सात दिनों के भीतर पूरी राशि जमा करने का अंतिम नोटिस जारी किया है।
ईपीएफओ द्वारा 23 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के बावजूद निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं की गई। इसके बाद 15 मई 2026 को स्मरण पत्र जारी कर चेतावनी दी गई कि यदि सात दिनों के भीतर ईसीआर के माध्यम से बकाया राशि जमा कर चालान प्रस्तुत नहीं किया गया तो कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
दस्तावेजों के अनुसार कर्मचारियों के वेतन से काटा गया ₹11.21 लाख कर्मचारी अंशदान, ₹3.43 लाख नियोक्ता अंशदान, ₹7.78 लाख कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) अंशदान, ₹50,430 प्रशासनिक शुल्क तथा ₹46,743 ईडीएलआई अंशदान सहित कुल ₹23,40,857 की राशि बकाया है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कर्मचारियों के वेतन से काटी गई पीएफ राशि वर्षों तक उनके खातों में जमा क्यों नहीं की गई। यदि कटौती नियमित रूप से हुई तो यह राशि आखिर कहां और किस मद में उपयोग की गई। इस खुलासे के बाद स्मार्ट सिटी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ईपीएफओ की सख्त चेतावनी के बाद अब सभी की नजर स्मार्ट सिटी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।


