पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के बाद प्रोफेसर का तबादला, कई अधिकारी जांच के घेरे में
जबलपुर। नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में फर्नीचर खरीदी से जुड़े कथित घोटाले ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महू स्थित वेटरनरी कॉलेज के लिए करीब 30 लाख रुपये से अधिक की फर्नीचर खरीदी में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के आरोपों की पुष्टि होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए सिविल एवं सप्लाई कार्यों से जुड़े प्रोफेसर एस.एस. कारमोरे का तबादला जबलपुर से महू कर दिया है।
मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार फर्नीचर खरीदी की टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और एक ऐसी कंसल्टेंसी फर्म को ठेका दे दिया गया, जिसका फर्नीचर निर्माण या विक्रय के क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं था। आरोप है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी साठगांठ कर उक्त कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया।
फर्नीचर खरीदी में अनियमितताओं का मुद्दा छात्र संगठन एबीवीपी द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति गठित की, जिसकी रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि महू वेटरनरी कॉलेज में जो फर्नीचर सप्लाई किया गया, उसकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। कई सामग्री निम्न स्तर की पाई गईं, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरा गई है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में गुणवत्ता संबंधी गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं।
जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जिस कंपनी को लाखों रुपये का ठेका दिया एमएम गया, वह मूल रूप से कंसल्टेंसी सेवाएं प्रदान करने वाली संस्था है। उसके पास न तो फर्नीचर निर्माण का अनुभव था और न ही आवश्यक संसाधन। इसके बावजूद उसे ठेका मिलना पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने निजी हितों के चलते कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया।
मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण में और कौन-कौन अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल थे। सूत्रों के अनुसार जांच की आंच कई अन्य जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई : कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनदीप शर्मा ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार या अनियमितता में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा तथा नियमों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल विश्वविद्यालय में फर्नीचर खरीदी से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


