जबलपुर। नगर निगम के वाहनों में डीजल आवंटन और खपत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि वाहन संचालन और डीजल वितरण की पूरी व्यवस्था में बड़े स्तर पर अनियमितताएं चल रही हैं। फर्जी ट्रिप दिखाकर अतिरिक्त डीजल लिया जा रहा है, जबकि कुछ मामलों में डीजल की कालाबाजारी तक किए जाने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक नगर निगम के विभिन्न विभागों को आवंटित वाहनों में डीजल भराने के दौरान भी गड़बड़ी की जा रही है। बताया जा रहा है कि जिस मात्रा की पर्ची जारी होती है, उसके मुकाबले पंप पर लगभग एक लीटर तक कम डीजल डाला जाता है। बचा हुआ डीजल बाद में स्टॉक में दिखाकर उसके दुरुपयोग या बिक्री का आरोप लगाया जा रहा है। नगर निगम के बेड़े में बड़ी संख्या में वाहन संचालित होने के कारण प्रतिदिन होने वाली यह छोटी कटौती समय के साथ बड़ी मात्रा में बदल जाती है।
कचरा वाहनों पर सबसे ज्यादा सवाल
नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों को लेकर सबसे अधिक चर्चाएं हैं। ये वाहन निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित किए जाते हैं, लेकिन इनके रखरखाव और ईंधन का खर्च निगम द्वारा वहन किया जाता है। आरोप है कि कचरा परिवहन में वास्तविक ट्रिप से अधिक ट्रिप दर्ज कराई जाती हैं, जिससे डीजल की अतिरिक्त मांग तैयार होती है।
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि फर्जी या बढ़ी हुई ट्रिप के नाम पर लिया गया अतिरिक्त डीजल खुले बाजार में बेचा जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि नगर निगम से निकलने वाला यह डीजल शहर के चंडाल भाटा क्षेत्र में सक्रिय कथित कालाबाजारी नेटवर्क तक पहुंचता है।
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
मामले ने नगर निगम की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यदि वाहनों की वास्तविक ट्रिप, किलोमीटर और डीजल खपत का नियमित सत्यापन किया जाए तो इस तरह की गड़बड़ियों पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में डीजल की खपत और वाहन संचालन के बीच पर्याप्त निगरानी नहीं होने की बात सामने आ रही है।
क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी
स्टोर एवं वर्कशॉप इंचार्ज जी.एस. मरावी ने कहा कि विभाग को संबंधित शाखाओं से जितनी डिमांड प्राप्त होती है, उसी के आधार पर डीजल आवंटित किया जाता है।
“हमारे पास संबंधित विभाग से जो डिमांड आती है, उसके आधार पर डीजल का आवंटन किया जाता है। डीजल का उपयोग कहां और कितना हो रहा है, इसकी मॉनिटरिंग करना हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। यह संबंधित विभाग का विषय है।”
अब सवाल यह है कि जब डीजल आवंटन और खपत के बीच कथित रूप से इतना बड़ा अंतर सामने आ रहा है, तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी। नगर निगम के भीतर डीजल वितरण, वाहन संचालन और ट्रिप रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच होने पर ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।


