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June 11, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

‘मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना संविधान के खिलाफ’, सीईसी से मिलने के बाद बोले अभिषेक मनु सिंघवी

नई दिल्ली, 10 जून । कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तन्खा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी, भूपेश बघेल, मीनाक्षी नटराजन शामिल थे। कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यसभा के लिए चुने गए व्यक्ति को शुरुआत में ही हटाया नहीं जा सकता। यह संविधान और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है। इससे बराबरी का मौका नहीं मिलता। अगर आप इस नजरिए से देखें तो यह संविधान की नींव को ही हिला देता है। आपने किसी को पहले ही दौड़ से बाहर कर दिया, ताकि चुनाव ही न हो। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने भारत निर्वाचन आयोग के साथ विस्तार से चर्चा की और तथ्य व आंकड़े उनके सामने रखे। मीनाक्षी नटराजन के मामले में रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) का फैसला विकृत है और कानूनी रूप से गलत है, जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता। रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया, वो आधार कानून में एग्जिट्स ही नहीं करता। ऐसा कोई क्रिमिनल केस था ही नहीं, जिसका मीनाक्षी खुलासा कर सकती थीं। कोर्ट से एक नोटिस आया, जिसमें मीनाक्षी से कहा गया कि आप आकर हमें बताइए कि हम केस का संज्ञान लें या नहीं। मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना एक प्राथमिक चरण होता है और उसमें यह फैसला किया जाता है कि ये केस आगे चलना चाहिए या नहीं। बिना संज्ञान के कोई भी क्रिमिनल केस जन्म ही नहीं लेता है। प्रतिनिधिमंडल ने आगे कहा कि मजे की बात यह है कि चुनाव आयोग के कानून में स्पष्ट लिखा है कि आपको सिर्फ वो खुलासा करना है, जिसमें अपराध अगर सिद्ध हो तो सजा दो साल से ज्यादा हो और जिसमें चार्जेस फ्रेम हो चुके हैं। इसे देखने का उत्तरदायित्व आरओ का होता है। इस मामले में मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया है। हमें उम्मीद और भरोसा है कि चुनाव आयोग यह समझेगा कि इससे एक बहुत बुरा, गलत और असमान माहौल बनता है। असमान माहौल लोकतंत्र की नींव पर चोट करता है। इसका उल्लंघन संविधान के मूल ढांचे पर भी चोट करता है, इसलिए हमने उनसे तुरंत फैसला लेने का अनुरोध किया है। हम नामांकन वापस लेने के दिन उनके पास आए हैं। काफी समय है। यह पूरी तरह से गलत, साफ तौर पर गैर-कानूनी और बिना किसी कानूनी आधार वाला आदेश है, और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। हमारी यही गुजारिश है।

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