मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करना संविधान और लोकतंत्र पर सुनियोजित हमला, जनता तानाशाही का जवाब देगी
बालाघाट। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में बुधवार को बालाघाट के काली पुतली चौक पर कांग्रेस द्वारा जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एकत्र होकर भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
धरने को संबोधित करते हुए शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्याम पंजवानी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं का लगातार दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां वोटों की चोरी कर सरकारें बनाई जाती हैं, वहीं पैसों और प्रलोभनों के दम पर चुनी हुई सरकारों को गिराया जाता है। अब भाजपा सरकार लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार, षड्यंत्र और तानाशाही के बल पर चल रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार वोट चोरी से आगे बढ़कर अब जनता के संवैधानिक अधिकारों की डकैती पर उतर आई है। संविधान का गला घोंटकर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचला जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति लगाकर और चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर उसे निरस्त करवाना लोकतंत्र की खुली हत्या है।
पंजवानी ने कहा कि यह हमला केवल एक उम्मीदवार पर नहीं, बल्कि संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार है। भाजपा विपक्ष की आवाज को दबाने का हरसंभव प्रयास कर रही है, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता डरने, झुकने और रुकने वाले नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि अहंकार कभी स्थायी नहीं रहा। रावण का घमंड भी चकनाचूर हुआ था और सत्ता के मद में चूर यह सरकार भी जनता की अदालत में जवाबदेह होगी। लोकतंत्र का गला घोंटने वालों को आने वाले समय में जनता करारा जवाब देगी।
धरने को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट सिंह सरस्वार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन एक गांधीवादी विचारधारा की सशक्त नेता हैं। कांग्रेस ने महिला सम्मान और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देते हुए उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन भाजपा ने छल, कपट और राजनीतिक षड्यंत्र का सहारा लेकर उनके नामांकन को निरस्त करवाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस पक्ष की बात सुनने तक का अवसर नहीं दिया गया। यहां तक कि पार्टी के वकीलों को भी अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि प्रलोभन, धनबल और सत्ता के दुरुपयोग से बनी यह सरकार अपनी नैतिकता खो चुकी है और सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
सरस्वार ने कहा कि किसानों, महिलाओं, युवाओं और आम जनता से किए गए वादों को भूल चुकी भाजपा सरकार का असली चेहरा अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। महंगाई, बेरोजगारी और जनविरोधी नीतियों ने जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। आने वाले समय में जनता भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे को पहचानकर उसे लोकतांत्रिक तरीके से करारा जवाब देगी।
धरना-प्रदर्शन में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
सम्राट सिंह सरस्वार, सुशील पालीवाल, जुगल शर्मा, कैलाश साहू, श्याम पंजवानी, जीतू राजपूत, जीतू बर्वे, भूरू पटेल, अनिल सोनी, अनिल बनोट, करण लिल्हारे, नरेंद्र मेश्राम, शिवम विश्वकर्मा, शिवम शर्मा, श्रीनिवास राव, अल्ला रखा, जयकृष्ण डिंगरू, शाहबाज़ अहमद, प्रवीण मदनकर, प्रतीक जैन, रामभाऊ पंचेश्वर, नितिन शिवहरे, धर्मेंद्र बोपचे, अफरोज कुरैशी, विवेक नागरे, नीटू कौशल, मधु गजभिए, पूजा गोस्वामी, विक्की पिछड़े, ऋषभ सहारे, सोमेंद्र बांसोड, तेजलाल सुलझे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


