50 लीटर से अधिक डिब्बे में ईंधन बिक्री पर कार्रवाई तय, स्टॉक छिपाने और विक्रय रोकने वालों पर भी गिरेगी गाज
लालबर्रा। क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर बनी परिस्थितियों के बीच जिला प्रशासन ने ईंधन वितरण व्यवस्था पर सख्ती बढ़ा दी है। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील किरार द्वारा पेट्रोल पंपों के निरीक्षण के दौरान संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसानों को आवश्यकता अनुसार 20 से 50 लीटर तक डीजल डिब्बे में दिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए किसान का नाम, पता, मोबाइल नंबर, वाहन नंबर तथा डीजल के उपयोग का उद्देश्य दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह पूरी जानकारी पेट्रोल पंप संचालकों को अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखनी होगी तथा प्रशासन को भी उपलब्ध करानी होगी।
निरीक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि पेट्रोल पंप संचालक अपने यहां 2,000 लीटर तक डीजल एवं 1,000 लीटर तक पेट्रोल रिजर्व स्टॉक के रूप में सुरक्षित रख सकते हैं। यह रिजर्व स्टॉक आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस, राजस्व विभाग, एम्बुलेंस सेवाओं, गंभीर मरीजों तथा अन्य आवश्यक प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
प्रशासन ने साफ किया है कि केवल रजिस्टर में नाम दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यकता पड़ने पर पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर प्रशासनिक दल संबंधित किसानों के घरों और खेतों तक पहुंचकर सत्यापन करेगा। जांच में यह देखा जाएगा कि किसानों द्वारा लिया गया डीजल वास्तव में कृषि कार्यों में उपयोग हो रहा है या नहीं। फर्जी किसानों के नाम पर एंट्री कर डीजल की कालाबाजारी या अवैध भंडारण की शिकायत मिलने पर जांच टीम मौके पर पहुंचकर पड़ताल करेगी।
सूत्रों के अनुसार प्रशासन शीघ्र ही निगरानी दल गठित कर सकता है, जो संदेहास्पद मामलों की जांच करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री कर ईंधन की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अवैध बिक्री पर रोक लगाना है। यदि जांच में किसी पेट्रोल पंप संचालक या अन्य व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ने चेतावनी दी है कि 50 लीटर से अधिक डीजल या पेट्रोल डिब्बों में विक्रय करना नियमों के विरुद्ध है। यदि किसी पेट्रोल पंप पर निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में ईंधन बिक्री या रिकॉर्ड में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित संचालक के विरुद्ध पेट्रोलियम नियमों एवं अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
स्टॉक होने के बावजूद बिक्री नहीं की तो भी होगी कार्रवाई
प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को यह भी स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि किसी पेट्रोल पंप पर पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल-डीजल उपलब्ध होने के बावजूद उपभोक्ताओं को ईंधन का विक्रय नहीं किया जाता है और इसकी शिकायत प्राप्त होती है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित पेट्रोल पंप संचालक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में कृत्रिम संकट उत्पन्न करना, स्टॉक छिपाकर रखना अथवा पेट्रोल-डीजल उपलब्ध होने के बावजूद उसका वितरण नहीं करना नियमों के विपरीत है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपलब्ध स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से प्रशासन को दें तथा आम नागरिकों, किसानों और आवश्यक सेवाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार ईंधन उपलब्ध कराएं।
वर्तमान में लालबर्रा क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर मिश्रित स्थिति बनी हुई है। कुछ पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध है, जबकि कई स्थानों पर वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आमजन की ओर से यह मांग भी उठ रही है कि प्रशासन पेट्रोल पंपवार उपलब्ध स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक करे, जिससे लोगों को ईंधन की तलाश में भटकना न पड़े और उपलब्ध स्टॉक का बेहतर उपयोग हो सके।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि संकट की इस घड़ी में जमाखोरी, कालाबाजारी, फर्जी एंट्री, निर्धारित सीमा से अधिक डिब्बों में बिक्री तथा स्टॉक होने के बावजूद विक्रय रोकने जैसी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


